चारभुजा नाथ जी का मंदिर कहां स्थित है ?

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चारभुजा नाथ जी का मंदिर कहां स्थित है ?

चारभुजा नाथ जी का मंदिर कहां स्थित है ? तथा चारभुजा नाथ जी का मेला कब लगता है और चारभुजा नाथ जी को किस नाम से जाना जाता है ?

चारभुजा नाथ जी का मंदिर कहां स्थित है ?
चारभुजा नाथ जी का मंदिर कहां स्थित है ?

चारभुजा नाथ जी का मंदिर कहां स्थित है ?

चारभुजा नाथ जी का मंदिर राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित गढ़बोर नामक स्थान पर स्थित है। यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य कला के चलते राजस्थान ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारत के प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है।

चारभुजा नाथ जी का मेला होली (फाल्गुन पूर्णिमा) तथा देव झुलनी एकादशी के दिन राजसमंद जिले के गढ़बोर नामक स्थान पर लगता है। इस मेले में राजस्थान के विभिन्न जिलों से सैकड़ो श्रद्धालु भाग लेने आते हैं। इनके मेले का मुख्य आकर्षण का केंद्र लोक संगीत और लोकगीतों पर डालते हुए भक्त जनों की कदमताल है।

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चारभुजा नाथ जी को मेवाड़ का वरीनाथ कहा जाता है और इनको इस नाम से जाना भी जाता है। चारभुजा नाथ जी को मेवाड़ का रक्षक भी कहते हैं और मेवाड़ के अधिकांश लोगों के चारभुजा नाथ जी परम आराध्य देव देव है।

चारभुजा नाथ जी के मंदिर की स्थापत्य कला जितनी उत्कृष्ट है उतनी ही प्राचीन है इस मंदिर की स्थापत्य कला किराडू के जैन मंदिरों की बात थी अपने आप में विशेष पहचान रखती है इसके अतिरिक्त मंदिर का गुंबद बहुत ही आकर्षक बनाया गया है।

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जिस पर उकेरी गई आकृतियों को देखकर हर कोई दंग रह जाता है। इसके चलते ही प्रतिमाह हजारों की संख्या में लोग भ्रमण करने के लिए आते हैं और चारभुजा नाथ जी के समक्ष अपनी इच्छाएं रहते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त यहां पर आता है वह खाली हाथ नहीं जाता है ऐसा कहा जाता है कि चारभुजा नाथ जी कुछ ना कुछ अज्ञात रूप में अपने भक्तों को देखकर अवश्य भेजते हैं।

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इसलिए ही इनके मंदिर प्रांगण में लगातार भक्तों का तांता लगा रहता है कहीं वक्त इनको लड्डू पान का भोग लगाते हैं तो कई इनको चावल और खिचड़ी का भोग लगाकर प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं।

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