ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन परिचय

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ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन परिचय

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन परिचय तथा ख्वाजा साहब के उर्स तथा उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन परिचय
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन परिचय

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन परिचय

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को गरीब नवाज के उपनाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म (पर्शिया) ईरान के संजरी नामक स्थान पर हुआ था तथा उनके गुरु का नाम शेख उस्मान हारुनी था।

पृथ्वीराज चौहान तृतीय के काल में यह मोहम्मद गौरी के साथ भारत आए थे तथा इनका कार्य क्षेत्र मुख्यतः राजस्थान का अजमेर जिला रहा है। इन्होंने चिश्ती संप्रदाय चलाया था।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की स्मृति में अजमेर जिले में ख्वाजा दरगाह का निर्माण इल्तुतमिश ने करवाया था। यहां पर बुलंद दरवाजे का निर्माण (मांडू( मध्य प्रदेश के सुल्तान महमूद खिलजी ने करवाया था।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर अकबर द्वारा बड़ी देग तथा जहांगीर द्वारा छोटी देग (कड़ाई) भेंट की गई थी। इनकी दरगाह में शाहजहानी मस्जिद का निर्माण मुगल शासक शाहजहां ने करवाया था तथा मुगल शासक अकबर ने ख्वाजा साहब की दरगाह के लिए 18 गांव भेंट यानी कि दान में दिए थे।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की यात्रा करने वाला भारत का प्रथम मुस्लिम शासक मुहम्मद बिन तुगलक था। ख्वाजा साहब का उर्स अजमेर जिले में लगता है यह उर्स एक रजब से छह रजब तक आयोजित होता है तथा इसे सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक माना जाता है।

ख्वाजा साहब की उर्स की शुरुआत भीलवाड़ा के सही गौरी परिवार द्वारा की जाती है भारत में इस्लाम धर्म का सबसे बड़ा तीर्थ अजमेर है इसलिए अजमेर को भारत का मक्का कहा जाता है।

भारत में मुस्लिम धर्म सर्वाधिक देसी तथा विदेशी अनुयायी प्रतिवर्ष सैकड़ो की संख्या में अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर मन्नत मांगने के लिए आते हैं। अजमेर दुनिया भर में मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र है।

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