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कार्तिक महीने का महत्व

कार्तिक महीने का महत्व

कार्तिक महीने का महत्व तथा कार्तिक महीने में क्या करना चाहिए और कार्तिक महीने में क्या नहीं करना चाहिए तथा कार्तिक महीने में किस की आराधना करनी चाहिए ?

कार्तिक महीने का महत्व
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कार्तिक महीने का महत्व

कार्तिक महीने का महत्व निम्नानुसार है-

हिंदू पंचांग का आठवां महीना कार्तिक का महीना होता है इस महीने को पवित्र महीना, पावन महीना तथा पुण्य मास के नाम से जाना जाता है इस महीने में स्नान करने का विशेष महत्व होता है।

कार्तिक का महीना साधु-संतों के लिए जप तथा तप करने के लिए उत्तम होता है जबकि यह महीना भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना होता है इस महीने में व्रत धारण करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कार्तिक महीने को धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष की प्राप्ति हेतु सर्वोत्तम महीना माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक महीने के समान कोई भी दूसरा महीना नहीं है। यानी कि दान पुण्य करने का जितना फल कार्तिक महीने में मिलता है उतना किसी भी सनातन धर्म के महीने में दान पुण्य करने का फल नहीं मिलता है।

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कार्तिक मास में सूर्य उदय से पहले उठना चाहिए तथा इस मास में सूर्य उदय से पूर्व भी स्नान आदि करना चाहिए। कार्तिक के महीने में कुएं, तालाब, बावडिया तथा नदियों के अंदर स्नान करने का विशेष महत्व होता है।

भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की आराधना करने के लिए कार्तिक का महीना सबसे अच्छा महीना माना जाता है क्योंकि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को यह महीना अधिक प्रिय होता है।

कार्तिक मास में पीपल के वृक्ष तथा आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व होता है इन दोनों वृक्षों की पूजा करने से इस महीने में उतना ही फल प्राप्त होता है जितना कि किसी गरीब तथा ऐसा ही व्यक्ति को भोजन कराने से होता है।

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कार्तिक के महीने में तुलसी की पूजा करनी चाहिए क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी का वृक्ष सबसे अधिक प्रिय होता है इसलिए इस महीने में तुलसी की पूजा करने का भी विशेष महत्व होता है।

भजन कीर्तन तथा जागरण करने की दृष्टि से भी कार्तिक मास को सबसे अच्छा महीना माना जाता है क्योंकि ईश्वर की आराधना करने के लिए इस महीने के समान कोई भी दूसरा महीना नहीं है। ऐसा उल्लेख धार्मिक ग्रंथों के अंदर मिलता है।

कार्तिक के महीने में तुलसी की पूजा आराधना करने से घर में सुख शांति आती है और नकारात्मक ऊर्जा का विनाश भी कार्तिक महीने में तुलसी पूजन करने से होता है।

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इस महीने में प्रतिदिन अपने शयन कक्ष के अंदर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीपक प्रज्वलित करना चाहिए ऐसा करने से व्यक्ति के विचारों में परिवर्तन होता है तथा व्यक्ति सकारात्मक सोच की ओर आगे बढ़ता है तथा व्यक्ति की नकारात्मकता का पूर्ण रूप से अंत होता है।

कार्तिक महीने के अंदर दीप दान करने का विशेष महत्व होता है यदि कोई जातक इस महीने के अंदर गंगा नदी के किनारे या अन्य किसी भी पवित्र नदी के किनारे या फिर पथवारी पर दीपक प्रज्वलित करता है तो उस व्यक्ति की सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है और हर प्रकार का कष्ट दूर होता है।

सभी महीनों में कार्तिक के महीने को सबसे कल्याणकारी और पुण्य प्रदान करने वाला महीना माना जाता है। इस महीने को मोक्ष की प्राप्ति का साधन भी माना जाता है यदि कोई व्यक्ति इस मास में संध्या के समय दीपदान करता है तो उसका पित्र दोष दूर होता है।

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इस महीने में तुलसी के पौधे को जल अर्पित करने का तथा तुलसी के पौधे के समक्ष संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने से भी विशेष फल की प्राप्ति होती है। और यदि कोई जातक इस महीने में भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्जवलित करता है तो इसे बहुत ही अच्छा माना जाता है।

कार्तिक मास के अंदर कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए तथा इस महीने के अंदर किसी भी जीव जंतु की हत्या नहीं करनी चाहिए इसके अतिरिक्त इस महीने में कोई भी गलत काम नहीं करना चाहिए जिससे कि किसी भी व्यक्ति की भावनाएं आहत हो।

कार्तिक महीने में भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए क्योंकि यह महीना पूर्ण रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है इसलिए इस महीने में इनकी पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

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