राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीलें

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आज इस अध्याय के माध्यम से हम आपको बताएंगे राजस्थान की प्रमुख झीलों से जुड़ी हुई संपूर्ण जानकारी।

राजस्थान में सर्वाधिक झीलें उदयपुर जिले में है इसलिए उदयपुर को झीलों की नगरी भी कहा जाता है।

वहीं अगर विश्व में झीलों की नगरी की बात करें तो फिनलैंड को कहा जाता है।

तथा भारत में झीलों की नगरी के नाम से श्रीनगर को जाना जाता है।

हिंदूओं का पंचम तीर्थ कहे जाने वाली पुष्कर झील का फोटो
हिंदूओं का पंचम तीर्थ कहे जाने वाली पुष्कर झील का फोटो

राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीले-

जयसमंद झील- इस झील का निर्माण 1685 से 1691 के मध्य महाराजा जयसिंह ने गोमती नदी पर बांध बनवा कर उदयपुर में करवाया था। यह राजस्थान की प्रथम भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झील है। इस झील पर 7 टापू बने हैं। जिन पर भील व मीणा जनजाति निवास करती है। इस झील पर बने 7 टापूओं में सबसे बड़ा टापू बाबा का भांगड़ा है तथा सबसे छोटा टापू प्यारी है इस झील के मगरा टापू पर होटल आइसलैंड बना है। इस झील का प्राचीन नाम ढे़बर है तथा इसे जलचरों की बस्ती भी कहा जाता है। पेयजल हेतु इस झील से श्याम नहर व भाट नहर दो नहरे निकाली गई है। इस झील की पूर्व दिशा में लसाडिया का पठार स्थित है।

पिछौला झील- उदयपुर में स्थित इस झील का निर्माण महाराणा लाखा के काल में 14वीं शताब्दी में एक अज्ञात बंजारे ने करवाया था तथा इसका पुनर्निर्माण महाराणा उदय सिंह ने करवाया था। ये उदयपुर की सबसे प्राचीन व प्रथम झील है। इस झील में दो नदियां (सीसारमा, बुझड़ा) आकर गिरती है। विश्व की प्रथम सौर ऊर्जा संचालित नांव इसी झील में चलाई गई थी। इस झील के किनारे नटनी का चबूतरा, दूध तलाई, गुलाब बाग तथा बागोर हवेली स्थित है। इस झील के मध्य दो महल बने हैं जिनमें से एक को जगमंदिर तो दूसरे को जगत निवास के नाम से जाना जाता है।

फतेहसागर झील- इस झील का निर्माण महाराणा जयसिंह ने उदयपुर में करवाया था तथा इसकी पूर्ण आधारशिला ड्यूक ऑफ़ कनोट ने रखी थी। तथा इस झील का पुनर्निर्माण  महाराजा फतेह सिंह ने करवाया था। इस झील को देबाली तालाब तथा कनोट बांध के नाम से भी जाना जाता है। इस झील में नेहरू टापू बना है जिसे नेहरू उद्यान भी कहा जाता है तथा इस नेहरू टापू पर गुजरात की सहायता से प्रथम सौर वेधशाला स्थापित की गई थी। इस झील पर बेल्जियम की सहायता से टेलिस्कोप का निर्माण कार्य किया जाता है। इस झील के किनारे पर सहेलियों की बाड़ी स्थित है।

Note– पिछौला झील में ज्यादा पानी होने पर स्वरूप सागर झील के माध्यम से फतेहसागर झील में डाला जाता है।

पुष्कर झील- अर्धचंद्राकार आकार में बनी ये झील राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है। इस झील को तीर्थराज/कोकण तीर्थ/तीर्थों का मामा तथा हिंदुओं का पंचम तीर्थ कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस झील का निर्माण ब्रह्मा जी ने करवाया था। यह सबसे बड़ी प्राकृतिक झील मानी जाती है। ये राजस्थान की सबसे पवित्र तथा प्रदूषित झील मानी जाती है। इस सबसे प्राचीन झील पर कुल 52 घाट स्थित है जिनमें सबसे बड़ा घाट जयपुर घाट तथा सबसे पवित्र घाट गौ घाट को माना जाता है। इस झील पर जनाना घाट का निर्माण 1911 में मैडम मेरी ने करवाया था इस घाट पर महात्मा गांधी की अस्थियों का विसर्जन किया गया था इसलिए इसे गांधी घाट भी कहा जाता है। इस झील पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को मेले का आयोजन होता है तथा इस मेले को राजस्थान का सबसे रंगीन मेला कहा जाता है। इस झील के किनारे मान पैलेस, ब्रह्मा जी का मंदिर, सावित्री माता का मंदिर तथा रंगनाथ जी का मंदिर स्थित है।

पुष्कर झील से जुड़ी कुछ किंवदंतियां-

इस झील पर वेदों को लिपिबद्ध किया गया था।

इस झील पर विश्वामित्र की तपस्या मेनका ने भंग की थी।

वेदव्यास ने महाभारत की रचना इसी झील पर की थी।

विश्व का पहला यज्ञ इसी झील पर हुआ था।

भगवान राम के पिता दशरथ का पिंडदान इसी झील में किया गया था।

बाल ठाकरे की अस्थियां इसी झीलल में बहाई गई थी।

कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम् नाटक की रचना इसी झील पर की थी।

गुरु गोविंद सिंह द्वारा गुरु पाठ का आयोजन इसी झील पर किया गया था।

आनासागर झील- इस झील का निर्माण 1135-37 के मध्य अर्णोराज (आनाजी) ने अजमेर में करवाया था। इस झील के किनारे पर दौलत बाग/ सुभाष उद्यान का निर्माण जहांगीर ने करवाया था जिस में रूठी रानी का महल बना है। इस झील के किनारे पर शाहजहां ने संगमरमर की बारहदरी का निर्माण करवाया था। इस झील के नजदीक चश्मा-ए-नूर झरना स्थित है।

फॉयसागर झील- अजमेर में इस झील का निर्माण इंजीनियर फाॅय ने करवाया था। इस झील का निर्माण बाढ़ पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से करवाया गया था। इस झील में बांडी नदी आकर गिरती है। इस झील के द्वारा आनासागर झील में पानी की आपूर्ति की जाती है।

बीसलसागर झील- इस झील का निर्माण अजमेर में बीसलदेव ने करवाया था ‌

नक्की झील- सिरोही जिले में स्थित इस झील को क्रेटर झील भी कहा जाता है इस झील का निर्माण ज्वालामुखी के फटने से तथा देवताओं के नाखूनों से हुआ ऐसा माना जाता है। ये राजस्थान की सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित झील है। यह एकमात्र ऐसी झील है जो शीतकाल में जम जाती है। इस झील में गरासिया जनजाति अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करती है तथा इस झील के किनारे पर अर्बुदा माता मंदिर व रंगनाथ जी का मंदिर स्थित है।

नक्की झील की प्रमुख आकृतियां-

1.टाड राॅक- मेंढक के समान
2.ऩद राॅक- बैल के समान
3.कपल राॅक- लड़का-लड़की के समान
4.नाॅन राॅक-महिला के समान

कोलायत झील- बीकानेर में स्थित इस झील को मरुस्थल का सुंदर मरू उद्यान कहा जाता है। ये झील N.H.15 पर स्थित है। यह बीकानेर की दूसरी सबसे बड़ी झील है इस झील में चारण जाति स्नान नहीं करती है इस झील पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को मेले का आयोजन होता है तथा इस मेले में दीपदान प्रथा का प्रचलन प्रसिद्ध है।

गजनेर झील- बीकानेर में स्थित इस झील को पानी का शुद्ध दर्पण कहते हैं ये बीकानेर की सबसे बड़ी झील है।

कायलाना झील- जोधपुर में स्थित इस झील का जीर्णोद्धार 1872 में सर प्रताप सह ने करवाया था इसलिए इसे सर प्रताप सागर बांध भी कहा जाता है इस झील के किनारे पर माचिया सफारी पार्क, कागा की छतरी तथा राठोड़ो की छतरी बनी है। इस झील के किनारे श्मसानो का मेला लगता है। ये राजस्थान की प्रथम झील है जिसे राजीव गांधी नहर से जोड़ा गया है।

बालसमंद झील- इस झील का निर्माण 1159 में परिहार शासक बालराव ने मंडोर (जोधपुर) में करवाया था।

सिलीसेढ़ झील- अलवर में इस झील का निर्माण 1845 में विनय सिंह ने करवाया था इसे राजस्थान का नंद कानन कहते हैं। इस झील के किनारे पर शीला महल स्थित है।

नंदसंमद झील- ये झील राजसमंद में स्थित है इसे राजसमंद की जीवन रेखा कहा जाता है।

गैबसागर/ एडवर्ड झील- डूंगरपुर में स्थित इस झील पर काली बाई का पनेरमा बना है।

तलवाड़ा झील- हनुमानगढ़ में स्थित इस झील में घग्घर नदी का जल भरता है।

बुद्धा जोहड़ झील- श्रीगंगानगर जिले में स्थित इस झील में गंगनहर का पानी भरता है।

मोती झील- इस झील का निर्माण भरतपुर में महाराजा सूरजमल जाट ने करवाया था इसे भरतपुर की लाइफ लाइन कहा जाता है।

झील का बारा झील- बयाना (भरतपुर)

कुछ अन्य महत्वपूर्ण मीठे पानी की झीले-

1. कनक सागर झील- बूंदी
2. दुगारी झील- बूंदी
3. नवलखा झील- बूंदी
4. अमर सागर झील- जैसलमेर
5.गढ़सीसर झील- जैसलमेर
6.काडिला झील- झालावाड़
7. मानसरोवर झील- झालावाड़
8.काडला झील- झालावाड़
9. मानसागर झील- जयपुर
10. रामगढ़ झील- जयपुर
11. चोपड़ा झील- पाली
12. तालाब ए शाही झील- धौलपुर
13. मानसरोवर झील- सवाई माधोपुर

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UP Exit Poll 2022: यूपी चुनाव एग्जिट पोल 2022‌

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राजस्थान के प्रमुख कुटीर उद्योग

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