ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि | Jyeshtha Amavasya Puja Vidhi

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ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि | Jyeshtha Amavasya Puja Vidhi

ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि | Jyeshtha Amavasya Puja Vidhi
ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि | Jyeshtha Amavasya Puja Vidhi

ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि | Jyeshtha Amavasya Puja Vidhi तथा ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा सामग्री और ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व व उससे संबंधित जानकारी।

ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि | Jyeshtha Amavasya Puja Vidhi
  • ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि की शुरुआत प्रातः काल के समय किसी भी धार्मिक नदी, तालाब, झील इत्यादि में स्नान करके करना चाहिए।ज्येष्ठ अमावस्या के दिन व्रत रखने से स्त्री तथा पुरुषों को समान रूप से फल की प्राप्ति होती है।
  • यदि किसी जातक के आसपास स्नान करने के लिए कोई भी पवित्र नदी, झील अन्यथा तालाब नहीं हो तो ऐसे जातक को अपने घर पर ही स्नान करते समय स्नान के लिए उपयोग में लेने वाले जल में थोड़ा गंगाजल मिला लेना चाहिए।
  • स्नान से निवृत्त होने के बाद में भगवान सूर्य देव को जल का अर्क देना चाहिए तथा इस दिन बहते हुए जल के अंदर दल प्रवाहित अवश्य करने चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से आपको शनिदेव के दोषों से मुक्ति मिलती है।
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  • इस दिन भगवान शनिदेव की पूजा की जाती है तथा वटवृक्ष को भी जल अर्पण करना अत्यंत ही शुभ होता है। ऐसा करने से मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है।
  • ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भगवान सूर्य देव, शनि देव, यम देवता तथा वट वृक्ष की पूजा अवश्य करनी चाहिए और इन तीनों के समक्ष ही जल अर्पण करना चाहिए।
  • ज्येष्ठ अमावस्या के दिन यदि कोई जातक व्रत धारण करता है तो उस जातक को सूर्य अस्त होने के बाद में भगवान सूर्य देव का ध्यान करके तथा शनि देव की आरती करने के पश्चात और यम देवता को प्रणाम करने के बाद भोजन करना चाहिए।
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  • क्योंकि ऐसा करने से ही उस जातक की संपूर्ण रूप से पूजा विधि संपन्न होती है और ईश्वर उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और अपनी कृपा भक्तों पर बरसाने लगते हैं।
  • यदि कोई भी जातक ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पूर्ण निष्ठा के साथ भगवान शनिदेव की पूजा आराधना करता है तो निश्चित रूप से ही उस व्यक्ति के जीवन से सभी कष्ट हटते हैं।
 ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म के अनुसार अमावस्या तिथि को धर्म-कर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व विशेष होता है क्योंकि इस दिन भगवान शनिदेव की जयंती भी मनाई जाती है।

प्रत्येक मास की अमावस्या की तुलना में ज्येष्ठ मास की अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस अमावस्या के दिन लोहे से निर्मित वस्तुएं दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि आती है तथा भगवान शनि देव के लोगों से भी मुक्ति मिलती है।

ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व विशेष होने के साथ-साथ ही अत्यधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है क्योंकि इस दिन व्रत करनी वाली महिलाओं के सुहाग की उम्र बढ़ती है और उनको अपने सुहाग से भरपूर प्रेम भी प्राप्त होता है।

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ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा सामग्री

ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा सामग्री में गंगाजल, सुखा चंदन , सूखा आंवला , सूर्य देव को अर्क दने के लिए चंदन मिश्रित गंगाजल तथा शनि देव को काले कपड़े का दान व वट वृक्ष को बांधने के लिए सूत का धागा इत्यादि महत्वपूर्ण है।

यदि इसी संपूर्ण पूजा सामग्री के साथ ज्येष्ठ अमावस्या के दिन कोई भी जातक पूजा करता है तो उस जातक के जीवन में आने वाले सभी कष्ट तो दूर होते ही है लेकिन साथ ही उस जातक को अपने जीवन में अनेक ऐसे परिवर्तनों का आभास होता है जो उसको उचित मार्ग की ओर लेकर जाता है।

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