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राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी: समाचार पत्र एवं संस्थाएं

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राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी: समाचार पत्र एवं संस्थाएं

राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी: समाचार पत्र एवं संस्थाएं व उनके प्रकाशन तथा संस्थापकों से संबंधित विस्तृत जानकारी।

राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी एवं उनका सेवा क्षेत्र

जमनलाल बजाज- इनका जन्म 4 नवंबर 1889 को सीकर जिले में हुआ। ये गांधीजी के पांचवें पुत्र के रूप में विख्यात थे। तथा इन्हें अंग्रेजों ने रायबहादुर की उपाधि प्रदान की थी जिसे उन्होंने वापस लौटा दिया था। ये स्वयं को गुलाम नंबर 4 मानते थे। इन्होंने 1927 ईस्वी में चरखा संघ की स्थापना की।

राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी: समाचार पत्र एवं संस्थाएं
राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी: समाचार पत्र एवं संस्थाएं

राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी: समाचार पत्र एवं संस्थाएं

भोगीलाल पंड्या- इनका जन्म 13 नवंबर 1904 को डूंगरपुर जिले में हुआ। इन्हें बांगड़ का गांधी कहा जाता है। आदिवासियों के मसीहा पांड्या ने बांगड़ सेवा मंदिर की स्थापना की। डूंगरपुर प्रजामंडल की स्थापना भी इन्होंने ही की थी।

सागरमल गोपा- जैसलमेर जिले में जन्मे सागरमल गोपा ने महारावल जवाहर सिंह के अत्याचारों का डटकर विरोध किया तथा यह प्रतिबंधित प्रजामंडल के नेता थे। इन्होंने आजादी के दीवाने तथा जैसलमेर में गुंडाराज नामक पुस्तक लिखी। इन्होंने अपनी अंतिम सांस जेल में ली थी।

रामनारायण चौधरी- इनका जन्म 1896 में सीकर जिले में हुआ। यह तरुण राजस्थान के संस्थापक रहे। तथा इन्होंने राजस्थान में जनचेतना के लिए नया राजस्थान नामक पत्र निकाला।

केसरी सिंह बारहठ- 21 नवंबर 1872 को राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में इनका जन्म हुआ। इनके पिता का नाम कृष्ण सिंह था। इन्होंने 1910 में वीर भारत सभा की स्थापना की तथा चेतावनी रा चुंगटिया नामक ग्रंथ लिखा। रूठी रानी, दुर्गा दास चरित्र कथा प्रताप चरित्र इनके प्रमुख ग्रंथ।

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विजय सिंह पथिक- उत्तर प्रदेश के गुणवली गांव में जन्मे विजय सिंह पथिक का वास्तविक नाम भूप सिंह राठौड़ था। उन्होंने 1916 में बिजोलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व किया। पथिक जी ने वर्धा से राजस्थान केसरी समाचार पत्र निकाला। इनके द्वारा जारी की गई सप्ताहिक पत्रिका का नाम राजस्थान संदेशा था।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रकाशित समाचार पत्र

प्रताप समाचार पत्र- गणेश शंकर विद्यार्थी व विजय सिंह पथिक इस समाचार पत्र के संस्थापक थे तथा ये कानपुर से निकलता था।

राजस्थान समाचार पत्र- मनीषा समर्थदान द्वारा इस समाचार पत्र का संपादन अजमेर से 1889 में किया गया। यह राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक पत्र था।

राजस्थान केसरी समाचार पत्र- विजय सिंह पथिक इसके संपादक थे तथा इसकी शुरुआत वर्धा से 1919 में की गई थी। तथा इसके लिए वित्तीय सहायता रामनारायण चौधरी व जमनलाल बजाज ने दी थी।

नवीन राजस्थान समाचार पत्र- इसे तरुण राजस्थान के नाम से भी जाना जाता है। इसकी शुरुआत 1921 में अजमेर से विजय सिंह पथिक द्वारा की गई थी।

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नवज्योति समाचार पत्र- इस समाचार पत्र का प्रकाशन 1936 में अजमेर से रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में आरंभ हुआ। जिसे बाद में दुर्गा प्रसाद ने संभाला।

प्रजा सेवक समाचार पत्र- जोधपुर से निकलने वाले इस समाचार पत्र के संपादक अचलेश्वर प्रसाद थे।

राजपूताना गजट समाचार पत्र- इसके संपादक मौलवी मुराद अली थे तथा इसका प्रकाशन अजमेर से होता था।

अखंड भारत समाचार पत्र- मुंबई से प्रकाशित होने वाले इस समाचार पत्र के संपादक जय नारायण व्यास थे। जिन्हें शेरे राजस्थान के नाम से जाना जाता है।

अग्निबाण समाचार पत्र- यह राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक पत्र था। जो ब्यावर अजमेर से निकलता था तथा इसके संस्थापक जयनारायण व्यास थे।

जय भूमि समाचार पत्र- इसके संपादक गुलाबचंद काला थे तथा इसका प्रकाशन जयपुर से होता था।

लोकवाणी पत्रिका- जयपुर से प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका के संपादक देवी शंकर तिवारी थे। यह पत्रिका जमुना लाल बजाज की स्मृति में निकलती है।

देश हितैषी समाचार पत्र- अजमेर से निकलने वाले इस समाचार पत्र के संपादक मुंशी मुन्नालाल थे।

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स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गठित संस्थाएं

सर्व हितकारिणी सभा- इसकी स्थापना 1907 में बीकानेर में की गई। इसके संस्थापक कन्यालाल ढूंढ तथा स्वामी गोपाल दास थे।

मारवाड़ सेवा संघ- मारवाड़ सेवा संघ की स्थापना चांदमल सुराणा ने 1920 में जोधपुर में की थी।

हिंदी साहित्य समिति– भरतपुर में महंत जगन्नाथ दास ने इसकी स्थापना की थी।

नागरी प्रचारिणी सभा- ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु व जोहरी लाल इंदु द्वारा इसकी स्थापना धौलपुर में की गई थी।

वीर भारत सभा– इसके संस्थापक विजय सिंह पथिक थे।

संप सभा- इसकी स्थापना 1883 में स्वामी गोविंद गिरी द्वारा की गई थी।

वर्धमान विद्यालय- अजमेर में स्थापित विधिलय को अर्जुन लाल सेठी ने जयपुर में स्थानांतरित किया।

बांगड़ सेवा मंदिर समिति- इसकी स्थापना डूंगरपुर में भोगीलाल पंड्या ने की थी।

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हरिजन सेवक संघ- हरिजन सेवक संघ की स्थापना रामनारायण चौधरी ने की थी।

राजस्थान दलित जाति संघ- इस संघ के संस्थापक अमृतलाल यादव थे।

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