संत रामचरण जी का जीवन परिचय 2024 | रामस्नेही संप्रदाय | इतिहास
संत रामचरण जी का जीवन परिचय 2024 | रामस्नेही संप्रदाय | इतिहास , संत रामचरण जी का जन्म कब और कहां हुआ था ? , संत रामचरण जी का बचपन का नाम क्या था ?

संत रामचरण जी का जीवन परिचय 2024 | रामस्नेही संप्रदाय | इतिहास
संत रामचरण जी के कुल 12 शिष्य हुए थे। तथा इन्होंने शाहपुरा (भीलवाड़ा) में रामस्नेही संप्रदाय की स्थापना की जहां इस संप्रदाय की मुख्य पीठ है। शाहपुरा में इस संप्रदाय का मुख्य मठ है, जिसे रामद्वारा कहा जाता है।
रामस्नेही संप्रदाय के अनुयायी गुलाबी वस्त्र धारण करते हैं तथा दाढ़ी मूछ नहीं रखते हैं। संत रामचरण जी समाधि स्थल शाहपुरा (भीलवाड़ा) में है। इसका निर्माण शाहपुरा के शासक रणसिंह ने करवाया था।
फूलडोल मेला (फूलडोल महोत्सव) रामस्नेही संप्रदाय का मुख्य मेला है। यह मेला चैत्र कृष्ण एकम (धूलण्डी) से चैत्र कृष्ण पंचमी (रंगपंचमी) तक भरता है।
संत रामचरण जी का जन्म कब और कहां हुआ था ?
संत रामचरण जी का जन्म राजस्थान के टोंक जिले के सोडा गांव में 1719 ईस्वी में हुआ था। तथा इनका पैतृक गांव टोंक जिले में ही बनवाड़ा है।
संत रामचरण जी का जीवन परिचय 2024 | रामस्नेही संप्रदाय | इतिहास
रामस्नेही संप्रदाय की प्रमुख शाखाएं
रैण शाखा – यह शाखा राजस्थान के नागौर जिले में स्थित मेड़ता के निकट रैण गांव में है। इस शाखा के प्रवर्तक संत दरियाव जी थे। संत दरियाव जी के पिता का नाम मानजी धुनिया तथा माता का नाम गीगण था।
संत रामचरण जी का जीवन परिचय 2024 | रामस्नेही संप्रदाय | इतिहास
सिंहथल शाखा – यह शाखा राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित सिंहथल गांव में है। इस शाखा के प्रवर्तक संत हरिराम दास जी थे। संत हरिराम दास जी के पिता का नाम भागचंद जोशी तथा माता का नाम रामी देवी था।
संत रामचरण जी का जीवन परिचय 2024 | रामस्नेही संप्रदाय | इतिहास
खैडापा शाखा- यह शाखा राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित खैडापा गांव में है। इस शाखा के प्रवर्तक संत राम दास जी थे। संत राम दास जी के पिता का नाम शार्दूल तथा माता का नाम अणमी देवी था।