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मीरा बाई का जीवन परिचय 2024 | दासी संप्रदाय | इतिहास

मीरा बाई का जीवन परिचय 2024 | दासी संप्रदाय | इतिहास

मीरा बाई का जीवन परिचय 2024 | दासी संप्रदाय | इतिहास ,मीरा बाई का जन्म कब और कहां हुआ ? , मीरा बाई के माता-पिता का क्या नाम था ? , मीराबाई के पति का क्या नाम हैं ?

मीरा बाई का जीवन परिचय 2024 | दासी संप्रदाय | इतिहास
मीरा बाई का जीवन परिचय 2024 | दासी संप्रदाय | इतिहास

मीरा बाई का जीवन परिचय 2024 | दासी संप्रदाय | इतिहास

राजस्थान की राधा और राजस्थान की राबिया नाम से प्रसिद्ध भक्त कवयित्री मीरा बाई को महात्मा गांधी ने विश्व की प्रथम सत्याग्रही महिला बताया था। मीरा बाई को मरुस्थल के तपोवन की शकुंतला भी कहा जाता है।

हिंदी की सप्रसिद्ध कवयित्री सुमित्रानंदन पंत ने मीरा बाई को वन की वसुंधरा कहा था। संत मीरा बाई के प्रारंभिक शिक्षक गजाधर गोड़ थे तथा उनके वास्तविक गुरु संत रैदास थे।

मीरा बाई ने दासी संप्रदाय चलाया था। तथा इन्होंने भगवान कृष्ण की माधुर्य भाव की भक्ति की थी। संत मीरा बाई के कहने पर रतना खाती ने “नरसी जी रो मायरो” नामक कथा लिखी।

मीरा बाई ने जीवन का अंतिम समय डाकोर (अहमदाबाद) के निकट रणछोड़ जी मंदिर में बिताया था। मीरा बाई का मुख्य मंदिर मेड़ता (नागौर) में है। जिसे चारभुजा नाथ मंदिर भी कहा जाता है।

इसके अतिरिक्त मीरा बाई का एक अन्य मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में है। इस मंदिर के सामने संत रैदास की छतरी बनी हुई है। इस मंदिर की मूर्ति वर्तमान में आमेर के जगत शिरोमणि मंदिर में है। जिसे यहां के शासक मानसिंह लेकर आए थे।

भक्त कवयित्री मीरा बाई की स्मृति में प्रतिवर्ष आश्विन पूर्णिमा के दिन अक्टूबर के महीने में मीरा महोत्सव का आयोजन होता है।

मीरा बाई का जन्म कब और कहां हुआ ?

भक्त कवयित्री मीराबाई का जन्म 1498 ईस्वी में आश्विन पूर्णिमा के दिन राजस्थान के पाली जिले कुड़की गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम रतन सिंह तथा माता का नाम वीर कुंवरी था। तथा उनके बचपन का नाम पेमल (कसबु कंवर) था।

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