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वट सावित्री व्रत पूजा विधि | Vat Savitri Vrat Puja Vidhi

वट सावित्री व्रत पूजा विधि | Vat Savitri Vrat Puja Vidhi

वट सावित्री व्रत पूजा विधि | Vat Savitri Vrat Puja Vidhi
वट सावित्री व्रत पूजा विधि | Vat Savitri Vrat Puja Vidhi

वट सावित्री व्रत पूजा विधि | Vat Savitri Vrat Puja Vidhi व वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री तथा वट सावित्री व्रत का महत्व से संबंधित विषेश जानकारी।

वट सावित्री व्रत पूजा विधि | Vat Savitri Vrat Puja Vidhi
  • प्राचीन काल से ही सनातन धर्म में वटवृक्ष यानी कि बरगद के वृक्ष की पूजा करने का महत्व विशेष रहा है। वट वृक्ष का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही इस वृक्ष का वैदिक महत्व भी है वट वृक्ष की पूजा अर्चना करने से महिलाओं के सुहाग की दीर्घायु होती है तथा उनका वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
  • सनातन धर्म में वटवृक्ष की टहनियों को यानि की शाखाओं को सावित्री का रूप माना जाता है जो कि भगवान ब्रह्मा की धर्मपत्नी थी। हिंदू धर्म में वट वृक्ष की पूजा करना ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश की पूजा करने के समान माना गया है।
  • वट सावित्री व्रत के दिन विवाहित महिलाओं को वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। और इस दिन पूजा अर्चना करने से पूर्व विवाहित महिलाओं को दुल्हन की भांति सजना सवारना चाहिए।
  • इसके बाद में विवाहित महिलाओं को वटवृक्ष यानी कि बरगद के पेड़ के नीचे सत्यवान तथा माता सावित्री की प्रतिमाएं स्थापित करनी चाहिए और उन्हें लाल वस्त्र धारण करवाने चाहिए।
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  • पूजा करने वाली महिलाओं को एक बांस से बनी हुई टोकरी लेनी चाहिए तथा उसके अंदर पांच प्रकार के अनाजों का संग्रहण करना चाहिए तथा उन अनाजों को दो अलग-अलग कपड़ों के अंदर बांधकर वटवृक्ष के नीचे रख देना चाहिए।
  • इसके बाद वट वृक्ष की पूजा अर्चना करने के लिए धूपबत्ती, कुमकुम, चंदन , रोली-मोली इत्यादि को एक थाली में सजाकर वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए।
  • भगवान सत्यवान तथा सावित्री की प्रतिमाओं की एक साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए इसके बाद में वट वृक्ष का एक पत्ता विवाहित महिलाओं को अपने बालों में लगाना चाहिए तथा माता सावित्री और भगवान सत्यवान की प्रतिमाओं को बांस के डंडे से बनी हवा खिलाने की छड़ी से उनको हवा खिलानी चाहिए।
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  • अंत में वट वृक्ष के चारों ओर घूमते हुए मौली या सूत के धागे से सात बार वट वृक्ष को लपेट ते हुए परिक्रमा करनी चाहिए और अपनी मनोकामना वटवृक्ष के समक्ष रखनी चाहिए। तथा ब्राह्मण को दक्षिणा देखकर वट सावित्री व्रत की पूजा विधि संपूर्ण करनी चाहिए।
  • तथा व्रत की पूजा विधि पूर्ण करने के बाद में घर आकर अपने सास-ससुर को और अपने पति को प्रणाम करना चाहिए तथा पति के पैरों को जल्द से धोना चाहिए और सूर्यास्त के बाद में मिठाई के साथ अपना व्रत खोल लेना चाहिए।
वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री

वट सावित्री व्रत के लिए पूजा सामग्री के में रोली, मोली, सूत का धागा , कुमकुम , चंदन , भगवान सत्यवान तथा माता सावित्री की प्रतिमाएं और अक्षत तथा धूपबत्ती महत्वपूर्ण होती है।

वट सावित्री व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का महत्व जितना वैदिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है उतना ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है इस दिन व्रत करने वाली महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है तथा व्रत करने से उनके पति को दीर्घायु प्राप्त होती है और संतान का सुख भी मिलता है।

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इसके अतिरिक्त वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व इसलिए भी होता है क्योंकि इस दिन का व्रत करने से पति तथा पत्नी के दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है तथा कभी भी उनके रिश्तो में खटास नहीं आती है और प्रेम संबंध उनके प्रबल होते हैं। इसलिए 20 दिन का विशेष महत्व होता है।

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