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संत रज्जब जी का जीवन परिचय 2024 | दादू संप्रदाय | इतिहास

संत रज्जब जी का जीवन परिचय 2024 | दादू संप्रदाय | इतिहास

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संत रज्जब जी का जीवन परिचय 2024 | दादू संप्रदाय | इतिहास
संत रज्जब जी का जीवन परिचय 2024 | दादू संप्रदाय | इतिहास

संत रज्जब जी का जीवन परिचय 2024 | दादू संप्रदाय | इतिहास

संत रज्जब जी दादू दयाल के प्रमुख शिष्यों में से एक है। यह सांगानेर के पठान मुसलमान थे। रज्जब की एकमात्र ऐसे संत थे जो आजीवन दूल्हे के वश में रहे। उनके अनुयायी रज्जबपंथी कहलाते हैं। जिनका मुख्य केंद्र वर्तमान में सांगानेर है।

संत रज्जब जी के संदर्भ में ” रज्जब तै गजब कियो, सिर पर बांध्यो मोड़। आया था हरि भजन को करै नरक गौड़” यह दोहा प्रचलित है जिससे दादू दयाल ने इनसे हुई पहली मुलाकात के बाद कहा था।

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार जानकारी मिलती है कि संत रज्जब जी विवाह करने के लिए घोड़ी पर सवार थे। उसी समय संत दादू दयाल उनकी आंखों में तेज देखकर कहा था कि हे रज्जब तुम्हारा जन्म ईश्वर भक्ति के लिए हुआ है और तुम वैवाहिक जीवन अपना कर नरक में क्यों जाना चाहते हो। उसके बाद ही रज्जब जी ने विवाह करने का विचार त्याग दिया तथा संत दादू दयाल के प्रमुख शिष्य बन गए।

एक ग्रंथ के अनुसार मिली जानकारी के अनुसार संत रज्जब जी आजीवन दूल्हे के वेश में रहे तथा जब संत दादू दयाल का निधन हुआ उसे समय इन्होंने उनके अंतिम दर्शन करने के बाद यह कह कर अपनी आंखें बंदकर ली की जब मेरे गुरु ही इस संसार में नहीं रहे तो मुझे इस दुनिया को देखकर क्या करना है। और अपनी देह का त्याग कर दिया।

रज्जब जी की प्रमुख रचनाएं कौन-कौन सी हैं ?

संत रज्जब जी ने रज्जब वाणी तथा रज्जब सर्वंगी नामक दो प्रमुख रचनाएं लिखी।

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