ऋषि पंचमी व्रत की पूजा विधि
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। जानिए ऋषि पंचमी व्रत की पूजा विधि

ऋषि पंचमी व्रत की पूजा विधि
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है इस दिन ऋषि मुनियों की पूजा-अर्चना की जाती है।
ऋषि पंचमी के दिन पूजा आरंभ करने से पूर्व स्नानादि से निवृत्त हो जाना चाहिए तथा इसके पश्चात घर के साफ आंगन को जल से धोकर उसके कुछ भाग पर हल्दी लगानी चाहिए।
इसके बाद थोड़ा गंगाजल लेकर के उसमें मिट्टी मिलाकर के सप्त ऋषि यों की मूर्ति बनानी चाहिए और उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद भगवान गणेश की एक छोटी मूर्ति इस स्थान पर स्थापित करनी चाहिए और भगवान गणेश की भी आराधना करनी चाहिए।
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आपने जो मिट्टी से मूर्तियां बनाई है और भगवान गणेश की मूर्ति जहां विराजमान की है उस स्थान पर गंगाजल छिड़क करके इसका शुद्धिकरण करना चाहिए। इसके बाद सप्त ऋषियों तथा भगवान गणेश की प्रतिमा को कलावा चढ़ाना चाहिए।
और एक माता अरुंधति की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए और उस पर चुनरी ओढ़ आनी चाहिए इसके बाद सभी को चंदन का तिलक करना चाहिए। चंदन का तिलक करने के पश्चात सभी प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित करने चाहिए।
पुष्प अर्पित करने के पश्चात सप्त ऋषि यों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए तथा भगवान गणेश की प्रतिमा को यथा स्थान पर स्थापित कर देना चाहिए और इस दिन कन्याओं को भोजन करवाना चाहिए तथा वस्त्र दान करने चाहिए।
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ऋषि पंचमी के दिन व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का मीठा भोजन नहीं खाना चाहिए संभव हो सके तो इस दिन केवल फलाहार लेना चाहिए तथा ऋषि पंचमी के दूसरे दिन भगवान गणेश की आराधना करने के पश्चात व्रत खोल लेना चाहिए।


