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पौष महीने का महत्व

पौष महीने का महत्व

पौष महीने का महत्व तथा पौष महीने में क्या करना चाहिए और पौष महीने में क्या नहीं करना चाहिए तथा पौष महीने में किस की आराधना करनी चाहिए ?

पौष महीने का महत्व
पौष महीने का महत्व

पौष महीने का महत्व

हिंदू पंचांग का दसवां महीना पौष मास के नाम से जाना जाता है इस महीने को खरमास भी कहा जाता है। दरअसल हिंदू महा का नाम उस माह कि आने वाली पूर्णिमा तथा नक्षत्र के आधार पर रखा जाता है। इसलिए पुष्प नक्षत्र के दौरान आने वाली पूर्णिमा के दौरान यह महीना आता है इसलिए इसको पौष महीने के नाम से जाना जाता है।

पौष का महीना भगवान सूर्य देव तथा विष्णु को समर्पित होता है इस महीने में भगवान विष्णु तथा सूर्य देव की पूजा आराधना करने से सुख समृद्धि में वृद्धि होती है और रुके हुए धन की प्राप्ति होती है।

पौष के महीने में भगवान विष्णु तथा भगवान सूर्य देव की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और सरकारी नौकरी का प्रयास करने वाले व्यक्तियों का भी सरकारी सेवाओं में चयन होता है तथा व्यवसाय में समृद्धि आती है।

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पौष के महीने का महत्व विशेष होता है इस महीने में रविवार के दिन व्रत करने और इस दिन तिल तथा चावल का भोग भगवान सूर्यदेव और विष्णु के समक्ष लगाने से सभी प्रकार के काम बनते हैं।

स्कंद पुराण के अनुसार पौष के महीने में गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए जैसे कि उन से बने हुए वस्त्रों का दान इस महीने में अवश्य करना चाहिए ऐसे करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख तथा शांति आती है।

पौष के महीने में नमक, चीनी, घी तथा तेल का सेवन नहीं करना चाहिए सनातन धर्म के अनुसार इस महीने में इनका सेवन करना वर्जित माना जाता है और यदि कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक इस महीने में इनका सेवन करता है तो उसके स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव दिखाई देता है।

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उसके महीने में अदरक तथा गुड और चावल का सेवन करना चाहिए क्योंकि इनका सेवन करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का फरक नहीं पड़ता है तथा व्यक्ति की सस्थ्य से संबंधित समस्याएं दूर होती है और स्थिति अनुकूल बनी रहती है।

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