पाबूजी राठौड़ का जीवन परिचय 2024 | Pabuji Rathore Biography in Hindi
पाबूजी राठौड़ का जीवन परिचय 2024 | Pabuji Rathore Biography in Hindi , पाबूजी का जन्म कब और कहां हुआ ? , पाबूजी के माता-पिता का क्या नाम है ? , पाबूजी की घोड़ी का क्या नाम है ?

पाबूजी राठौड़ का जीवन परिचय 2024 | Pabuji Rathore Biography in Hindi
मारवाड़ के पंच पीरों में लोक देवता पाबूजी राठौड़ का विशेष स्थान है। पाबूजी को लक्ष्मण का अवतार माना जाता है। तथा मारवाड़ क्षेत्र में पाबूजी की पूजा ऊंटों के रक्षक लोक देवता तथा प्लेग रक्षक लोक देवता के रूप में की जाती है। पाबूजी ने अपने दिव्य ज्ञान से ऊंटों में होने वाले सर्रा रोग का निवारण किया था। इसलिए इनको सर्रा रोग का निवारक देवता भी कहा जाता है।
पाबूजी का जन्म कब और कहां हुआ ?
लोक देवता पाबूजी राठौड़ का जन्म 1239 ईस्वी में चैत्र अमावस्या के दिन जोधपुर जिले के फलोदी के निकट कोलुमंड गांव में हुआ था।
पाबूजी के माता-पिता का क्या नाम है ?
पाबूजी राठौड़ के पिता का नाम धांधल जी राठौड़ था तथा उनकी माता का नाम कमला दे था।
पाबूजी की घोड़ी का क्या नाम है ?
लोक देवता पाबूजी अपनी घोड़ी को अपने प्राणों से भी प्रिय मानते थे। इनकी घोड़ी का नाम केसर कालमी था।
लोक देवता पाबूजी राठौड़ के उपनाम
- ऊंटों के देवता
- ऊंटों के रक्षक देवता
- प्लेग रक्षक लोक देवता
- सर्रा रोग के निवारक देवता
- बांयी ओर झुकीं हुई पाग (पगड़ी) के देवता
- राठौड़ी राजा
- कमध्वज
- पाबू भालालों
पाबूजी राठौड़ की पत्नी का नाम
पाबूजी का विवाह अमरकोट के राजा सूरजमल सोडा की पुत्री सुप्यार दे (फुलम दे) के साथ हुआ था।
पाबूजी राठौड़ के गुरु का नाम
लोक देवता पाबूजी राठौड़ की संपूर्ण शिक्षा समरथ भारती के सानिध्य में हुई थी। इसलिए लोक देवता पाबूजी के गुरु समरथ भारती थे।
पाबूजी राठौड़ का प्रतीक चिन्ह
लोक देवता पाबूजी राठौड़ के प्रतीक चिन्ह के रूप में उनके मंदिरों में उनकी प्रतिमा में भाला लिए हुए अश्वारोही का चित्रण है।
पाबूजी के सहयोगी
चांदा, डेमा , हरमल राईका, सलजी सोलंकी तथा सांवत लोक देवता पाबूजी राठौड़ के प्रमुख सहयोगी थे।
लोक देवता पाबूजी किसके आराध्य देवता है ?
लोक देवता पाबूजी रायका, रेबारी, देवासी, चारण, नायक तथा मेहर मुस्लिम जाति के आराध्य देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
लोक देवता पाबूजी के जीवन पर लिखी गई प्रमुख रचनाएं-
पाबू प्रकाश- पाबूजी के जीवन पर लिखी गई इस रचना के रचयिता आसिया मोडजी है। जिसे डिंगल शैली में लिखा गया है तथा इसमें पशु चिकित्सा का वर्णन किया गया है।
पाबूजी रा दूहा- पाबूजी के जीवन पर आधारित इस ग्रंथ की रचना लघराज ने की थी।
पाबूजी रा छंद- लोक देवता पाबूजी के बारे में वर्णित इस ग्रंथ की रचना बिट्टू मेहा की थी
पाबूजी रा सोरठा- इस सुप्रसिद्ध ग्रंथ की रचना लोक देवता पाबूजी की स्मृति में रामनाथ कविया ने की थी।
पाबूजी रा रूपक- इस ग्रंथ के रचनाकार मोतीसर बगतावर माने जाते हैं।
पाबूजी री बात- लोक देवता पाबूजी के ऊपर लिखे गए इस ग्रंथ की रचना लक्ष्मी कुमारी चुंडावत ने की है। जिन्हें राणी जी के नाम से भी जाना जाता है।
पाबूजी की फड़ के संपूर्ण बारे में जानकारी
राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में ऊंट पशु के बीमार होने पर तथा उसके स्वस्थ होने पर लोक देवता पाबूजी राठौड़ की फड़ का वाचन किया जाता है।
लोक देवता पाबूजी की फड़ का वाचन नायक जाति के भौपे रावण हत्था नामक वाद्य यंत्र के साथ करते हैं। इनकी फड़ में इनकी घोड़ी केसर कालमी का रंग काला दर्शाया गया है।
पाबूजी का मेला कब और कहां लगता है ?
पाबूजी का मेला प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या के दिन जोधपुर जिले के फलौदी कस्बे के निकट कोलुमंड नामक स्थान पर लगता है। इसके अतिरिक्त पाबूजी का एक अन्य मेला देंचू नामक स्थान पर जोधपुर जिले में लगता है।
पाबूजी ने गायों की रक्षा हेतु किसके साथ युद्ध लड़ा ?
लोक देवता पाबूजी राठौड़ ने देवली चारणी नामक स्त्री की गायों की रक्षा के लिए अपने बहनोई जिन्दराव खींची के साथ युद्ध लड़ा तथा इस युद्ध के दौरान पाबूजी लड़ते हुए सन 1276 ईस्वी में जोधपुर जिले के देचू नामक स्थान पर शहीद हुए।
पाबूजी का मुख्य मंदिर कहां स्थित है ?
लोक देवता पाबूजी राठौड़ का मुख्य मंदिर राजस्थान के जोधपुर जिले के फलोदी तहसील के कोलुमंड गांव में स्थित है। इसके अतिरिक्त इनका एक अन्य मंदिर जोधपुर जिले के देचू नामक स्थान पर बना हुआ है।
पाबूजी के पावड़े किस वाद्य यंत्र के साथ गाये जाते हैं ?
लोक देवताओं की वीर गाथाओं का बखान करना पावड़े कहलाता है तथा लोक देवता पाबूजी राठौड़ के पावड़े माठ वाद्य यंत्र के साथ गाये जाते हैं।
लोक देवता पाबूजी राठौड़ के संबंध में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी-
- लोक देवता पाबूजी के मेले में उनके भक्तों के द्वारा थाली लोक नृत्य किया जाता है।
- पाबूजी की लोक कथा ‘पाबू धणी री वाचना’ का गायन थौरी जाति के लोग सारंगी वाद्य यंत्र के साथ करते हैं।
- लोक देवता पाबूजी राठौड़ ने गुजरात के शासक आना भागेला के विरुद्ध सात थौरी भाइयों को शरण दी थी।
- पाबूजी राठौड़ ने पाटन के सूबेदार मिर्जा खां को युद्ध में पराजित किया था।


