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धनतेरस व्रत कथा , Dhanteras vrat katha

धनतेरस व्रत कथा , Dhanteras vrat katha

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एक समय की बात है हजारों वर्ष पूर्व भगवान विष्णु धरती लोक पर घूमने आए थे। जब माता लक्ष्मी ने भी उनके साथ चलने के लिए निवेदन किया था। जब भगवान विष्णु ने कहा था कि यदि तुम मेरी एक बात मान लो तो मैं तुम्हें मेरे साथ ले जा सकता हूं।

जैसे ही भगवान विष्णु ने अपनी बात लक्ष्मी जी को मानने को कहीं तो माता लक्ष्मी ने उनकी बात मान ली और उनके साथ धरती लोग पर चल पड़ी। और जैसे ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर पहुंचे तो भगवान विष्णु ने कहा कि है लक्ष्मी तुम मेरा इंतजार करना जब तक मैं यहां वापस लौटकर नहीं आ जाता।

यह कहकर भगवान विष्णु दक्षिण दिशा की ओर चल पढ़ते हैं और माता लक्ष्मी से कहते हैं कि तुम इस दिशा की ओर मत आना । लेकिन भगवान विष्णु के मना करने के बावजूद माता लक्ष्मी के मन में शंका हुई कि आखिर इस दिशा में ऐसा है क्या और उनसे नहीं रहा गया। और बच्चे भगवान विष्णु के पीछे-पीछे दक्षिण दिशा की ओर ही चल पड़ी।

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जैसे ही माता लक्ष्मी कुछ दूरी पर चलती है तो उनको बहुत सारे सरसों के खेत और उनमें लगे फूल दिखाई देते हैं तो माता उनको देखकर प्रसन्न हो गई और फूलों से अपना श्रृंगार करने लगी। और इसके बाद जैसे ही माता लक्ष्मी आगे बढ़ती है तो उनको गन्ने का खेत दिखाई देता है जिसमें माता गन्ने का रस चूसने लगती है।

और इस समय भगवान विष्णु वहां पर आते हैं और माता लक्ष्मी को उसे दिशा में आता हुआ देखकर क्रोधित होकर उनका श्राप देते हैं। और कहा कि अब तुम्हें 12 महीने तक किसान की सेवा करनी होगी क्योंकि तुमने किसान की फसल का नुकसान किया है और भगवान क्षीरसागर चले गए।

और माता लक्ष्मी उसे गरीब किसान के घर पर ही रहने लगी और उन्होंने एक अपनी प्रतिमा बनाई और किस की पत्नी से कहा कि तुम इसकी पूजा अर्चना करो किसान की पत्नी लक्ष्मी जी के कहे अनुसार ही करने लगी और जब किसान की फसल काटने की बारी आई तो किसान को अत्यधिक फसल उत्पन्न हुई और अत्यधिक लाभ प्राप्त हुआ।

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और किस के पास अत्यधिक धन तथा समृद्धि हो गई और किस ने माता लक्ष्मी से वरदान मांगा की है मां लक्ष्मी उसको कभी भी खाने की कमी नहीं होने देना जिसके चलते आज किस दूसरों का पेट भरता है।

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