HomeALLगागरोन का किला

गागरोन का किला

Published on

spot_img

गागरोन का किला

गागरोन का किला राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है। इस किले का प्रारंभिक निर्माण परमार राजपूतों ने करवाया था तथा अंतिम निर्माण देवी सिंह खींची व डोडा वंश के शासक बीजलदेव ने करवाया था। इस किले का नामकरण देवी सिंह खींची ने किया था।

गागरोन के किले को डोडगढ़/धुलागढ़ /शाहगढ़/गीधकगढ़ आदि उपनामों से जाना जाता है। इसके लिए का प्राचीन नाम गर्गराटपुर है। गागरोन का किला औरंगजेब द्वारा बनवाए गए बुलंद दरवाजे के लिए भी प्रसिद्ध है। ये किला कालीसिंध तथा आहू नदी के संगम पर बना है।

गागरोन के किले को महमूद खिलजी प्रथम में मुस्तफाबाद नाम दिया था। इसके किले में हीरामन जाति के तोते पाए जाते हैं। गागरोन के इस भव्य किले में अपराधियों को सजा देने हेतु गीधकराई पहाड़ी बनी हुई है। हमामुद्दीन तथा मीठे शाह की दरगाह भी इसी गागरोन के किले में बनी हुई है।

गागरोन के किले की खासियत- 

गागरोन का किला संपूर्ण भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसमें नींव का पत्थर नहीं रखा गया है।

गागरोन का किला राजस्थान का एकमात्र ऐसा किला है जो विंध्याचल पर्वत श्रेणी पर बना है तथा नींव का पत्थर नहीं होने की वजह से इसका निर्माण कड़ी शीला पर किया गया है।

गागरोन का किला राजस्थान का एकमात्र ऐसा किला है जिसमें अभी भी दुश्मन सेना पर पत्थर की वर्षा करने वाला यंत्र सुरक्षित लगा हुआ है।

गागरोन के किले के प्रमुख दर्शनीय स्थल- 

गागरोन के किले में लगी सिक्के डालने की टकसाल दर्शनीय हैं इसमें प्राचीन समय में शालिम शाही लिखा हुआ सिक्का बनता था।

अचलदास महल, सरपट महल, रंग महल तथा खीचियां महल भी गागरोन किले के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल है।

गागरोन के किले में दुर्जन सिंह द्वारा बनवाया गया मधुसूदन जी का मंदिर भी दर्शनीय हैं।

गागरोन के किले से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी-

गागरोन के किले के परकोटे को जालिम कोट/ तिहरा कोट परकोटा कहा जाता है।

प्रसिद्ध लोक संत पीपा की जन्म स्थली एवं छतरी गागरोन के किले में स्थित है।

शिवदास गाडण ने अचलदास खींची वांचनिका नामक पुस्तक की रचना गागरोन के किले में ही की थी।

पृथ्वीराज राठौड़ ने वेलिकिशन रुक्मणी री ख्यात पुस्तक की रचना भी गागरोन के किले में ही की थी।

गागरोन के किले में हुए 2 प्रमुख शाके- 

1. प्रथम शाका- 1426 में हुए इस शाके के समय गागरोन के शासक अचलदास खींची थे।

2. दुसरा शाका- 1444 में हुए इस शाके के समय यहां कू शासक प्लहणसी थे।

राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलें

राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीलें

हनुमान बेनीवाल का जीवन परिचय (Biography of Hanuman Beniwal)

Punjab Election Exit Poll 2022: पंजाब चुनाव एग्जिट पोल 2022‌

UP Exit Poll 2022: यूपी चुनाव एग्जिट पोल 2022‌

 

Latest articles

सपने में प्राइवेट पार्ट देखना (Sapne me private part dekhna)

सपने में प्राइवेट पार्ट देखना (Sapne me private part dekhna) सपने में प्राइवेट पार्ट...

बायतु विधानसभा सीट होगी खत्म, हरीश चौधरी को करनी होगी मेहनत

बायतु विधानसभा सीट होगी खत्म, हरीश चौधरी को करनी होगी मेहनत बाड़मेर जिले की बायतु...

बाड़मेर कांग्रेस में जाट वर्सेज गैर जाट राजनीति तेज

बाड़मेर कांग्रेस में जाट वर्सेज गैर जाट राजनीति तेज राजस्थान के बाड़मेर जिले की कांग्रेस...

बायतु से 2028 में कौन होगा विधायक ?

बायतु से 2028 में कौन होगा विधायक ? परिसीमन के बाद तीन बार कांग्रेस पार्टी...

More like this

सपने में प्राइवेट पार्ट देखना (Sapne me private part dekhna)

सपने में प्राइवेट पार्ट देखना (Sapne me private part dekhna) सपने में प्राइवेट पार्ट...

बायतु विधानसभा सीट होगी खत्म, हरीश चौधरी को करनी होगी मेहनत

बायतु विधानसभा सीट होगी खत्म, हरीश चौधरी को करनी होगी मेहनत बाड़मेर जिले की बायतु...

बाड़मेर कांग्रेस में जाट वर्सेज गैर जाट राजनीति तेज

बाड़मेर कांग्रेस में जाट वर्सेज गैर जाट राजनीति तेज राजस्थान के बाड़मेर जिले की कांग्रेस...