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लोक देवता तल्लीनाथ जी का जीवन परिचय 2024 | tallinathji Biography in Hindi

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लोक देवता तल्लीनाथ जी का जीवन परिचय 2024 | tallinathji Biography in Hindi

लोक देवता तल्लीनाथ जी का जीवन परिचय 2024 | tallinathji Biography in Hindi , तल्लीनाथ जी का मंदिर कहां है ? , तल्लीनाथ जी के गुरु का क्या नाम है ? , तल्लीनाथ जी का वास्तविक नाम क्या है ?

लोक देवता तल्लीनाथ जी का जीवन परिचय 2024 | tallinathji Biography in Hindi
लोक देवता तल्लीनाथ जी का जीवन परिचय 2024 | tallinathji Biography in Hindi

लोक देवता तल्लीनाथ जी का जीवन परिचय 2024 | tallinathji Biography in Hindi

प्रकृति प्रेमी तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले लोक देवताओं में तल्लीनाथ जी का नाम महत्वपूर्ण है। लोक देवता तल्लीनाथ जी ने आजीवन पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य किया तथा लोगों को पर्यावरण की रक्षा करने के लिए भी प्रेरित किया।

पर्यावरण संरक्षण के लिए तल्लीनाथ जी के द्वारा किए गए कार्य और प्रयास सराहनीय हैं। तत्कालीन समय में इनके द्वारा प्रकृति की रक्षा के लिए दिए गए योगदान अमूल्य है। जिसके चलते ही आज इनका नाम राजस्थान के प्रकृति प्रेमियों के दिलों में अमर हो गया है।

तल्लीनाथ जी का मंदिर कहां है ?

लोक देवता तल्लीनाथ जी का मंदिर राजस्थान के जालौर जिले के पांंचौटा गांव में पंचमुखी पहाड़ी पर स्थित है। तल्लीनाथ जी को प्रकृति प्रेमी लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। तथा इनके मंदिर के आसपास की भूमि ओरण कहलाती है।

तल्लीनाथ जी के गुरु का क्या नाम है ?

तल्लीनाथ जी के गुरु का नाम जालंधर नाथ था। जिनके सानिध्य में तल्लीनाथ जी ने पर्यावरण संरक्षण के गुण सीखे थे।

तल्लीनाथ जी का वास्तविक नाम क्या है ?

तल्लीनाथ जी का वास्तविक नाम गांगदेव राठोड़ था।राठोड़ वंश में जन्मे तल्लीनाथ जी बचपन से ही प्रकृति प्रेमी थे।

तल्लीनाथ जी कहां के शासक थे ?

लोक देवता तल्लीनाथ जी राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित शेरगढ़ नामक स्थान के शासक थे। तल्लीनाथ जी ने सभी प्रकार की मोह माया का त्याग कर अपना जीवन पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया था।

तल्लीनाथ जी के उपनाम 

लोक देवता तल्लीनाथ जी को प्रकृति प्रेमी लोक देवता तथा प्रकृति रक्षक और ओरण के देवता के उपनाम से जाना जाता है।

Note- पर्यावरण संरक्षण के लिए मंदिरों के आसपास देवी देवताओं के नाम से छोड़ी जाने वाली तथा दान में दी जाने वाली भूमि ओरण भूमि कहलाती है।

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