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राजस्थान की वेषभूषा और पहनावा-2023 (Rajasthani Costumes in Hindi)

राजस्थान की वेषभूषा और पहनावा-2023 (Rajasthani Costumes in Hindi)

राजस्थान के पुरुषों की वेशभूषा, राजस्थान की स्त्रियों की वेशभूषा , जनजातियों की वेशभूषा, Rajasthan ki veshbhusha , राजस्थान का पहनावा और वेशभूषा।

राजस्थान की वेषभूषा और पहनावा ही राजस्थान की पहचान है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग वेषभूषा और पहनावे का प्रचलन है।

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके पहनावे व वेषभूषा के अनुसार जाना जाता है तथा इनका पहनावा ही इनके रहन-सहन का निर्धारण करता है।

राजस्थान की वेषभूषा और पहनावा के बारे में विशेष जानकारी-

  • राजस्थान के शासकों द्वारा मुगल काल में युद्ध करते समय केसरिया रंग की पगड़ी पहनी जाती थी और इसी केसरिया रंग की पगड़ी से योद्धाओं को जाना जाता था।
  • राजस्थान के उदयपुर जिले के लोगों द्वारा चुंडावती पगड़ी तथा भीलवाड़ा के लोगों द्वारा राठौड़ी पगड़ी पहनी जाती थी और इस पगड़ी के माध्यम से ही इन लोगों को जाना जाता था।
  • राजस्थान के भील समुदाय के लोग सिर पर रंगीन साफा बांधते थे जिसे फेटा कहा जाता था और यह फेटा ही भील समुदाय के लोगों की पहचान था।
राजस्थान की वेषभूषा और पहनावा-2023 (Rajasthani Costumes in Hindi)
राजस्थान की वेषभूषा और पहनावा-2023 (Rajasthani Costumes in Hindi)
  • राजस्थानी पुरुषों के गले में डाले जाने वाला वस्त्र अंगोछा कहलाता है।
  • राजस्थान के आदिवासी समुदाय में शरीर को ढकने के लिए प्रयोग किए जाने वाले वस्त्र को फालू कहा जाता है।
  • राजस्थान में पुरुषों द्वारा कमर के ऊपर पहने जाने वाले वस्त्र जिसमें रस्सी लगी होती है उसे अंगरखी या बुगतरी के नाम से जाना जाता है इसका प्रयोग सर्वाधिक गुर्जर जाति के लोगों द्वारा किया जाता है
  • भील जनजाति के लोगों द्वारा पहने जाने वाली तंग धोती या लंगोट को ढेपाड़ा नाम से जाना जाता है।
  • राजस्थान में महिलाओं द्वारा कमर से ऊपर पहने जाने वाले वस्त्र को कुर्ती कहा जाता है इसमें बाहे होती है।

यह भी पढ़ें राजस्थान की बोलियां (Rajasthan ki boliyan)

  • राज्य में महिलाओं द्वारा गले से लेकर पांव तक पहने जाने वाले लंबे वस्त्र को पेसवाज के नाम से जाना जाता है।
  • आदिवासी समुदाय की महिलाओं द्वारा पहने जाने वाली साड़ी को जामसाई कहा जाता है तथा आदिवासी महिलाओं के गागरे की छिंट को रेनसाई कहते हैं।
  • आदिवासी या भील जनजाति की महिलाओं द्वारा घुटनों तक पहने जाने वाला अधोवस्त्र कछाबू के नाम से जाना जाता है।
  • मराठी अंदाज में जो साड़ी कथोड़ी जनजाति की महिलाओं द्वारा पहनी जाती है उसे फड़का कहते हैं।
  • कमर के ऊपर कमीज जैसी वेशभूषा जो गरासिया जनजाति की महिलाओं द्वारा पहनी जाती है उसे झूलकी कहते हैं।
  • गुलाबी रंग की साड़ी जो आदिवासियों में दुल्हन के द्वारा पहनी जाती है उसे पंवरी कहते हैं।

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