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Rajasthan: राजस्थान की लोक देवियां

Rajasthan: राजस्थान की लोक देवियां

इस लेख के माध्यम से आज हम आपको राजस्थान की लोक देवियां तथा उनके के बारे में।

Rajasthan: राजस्थान की लोक देवियां
Rajasthan: राजस्थान की लोक देवियां

1. लोक देवी करणी माता- इनका मंदिर (देशनोक) बीकानेर में स्थित है। जिसका निर्माण कार्य प्रारंभ राव बीका ने करवाया था। तथा इनके मंदिर का आधुनिक निर्माता महाराजा गंगा सिंह को माना जाता है। इनकी गुफा धीनेरू तलाई दियात्रा गांव बीकानेर में है। इनका प्रतीक चिन्ह सफेद चील को माना जाता है तथा इनका लोकगीत चिरजा है। करणी माता का मेला वर्ष में दो बार आयोजित होता है। (चैत्र व आश्विन नवरात्रों में) करणी माता की आरती दो प्रकार से की जाती है। इन्हें ओलावृष्टि की रक्षक देवी भी कहा जाता है। ये बीकानेर के राठौड़ वंश की कुलदेवी है।

2. लोक देवी तनोट माता- इनका मंदिर जैसलमेर में स्थित है जिसका निर्माण 888 ईस्वी में तणुराय ने करवाया था। इनके मंदिर में पुजारी बीएसएफ का जवान होता है। तनोट माता को रुमाल वाली देवी, सैनिकों की देवी व थार की वैष्णो देवी के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि 1965 में भारत तथा पाकिस्तान के मध्य हुए युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा दागे गए गोले इस मंदिर परिसर में स्वत ही निष्क्रिय हो गए थे जो आज भी मंदिर के पास स्थित वार म्यूजियम में संग्रहित है।

3. लोक देवी जीण माता- इनका मंदिर सीकर जिले के रेवासा में स्थित है। जिसका निर्माण राजा हट्टड़ ने करवाया था। इसे मधुमक्खियों की देवी भी कहा जाता है। ये चौहानों की कुलदेवी तथा मीणा जनजाति की आराध्य देवी मानी जाती है। इनके मंदिर में मुगल शासक औरंगजेब ने सोने का छत्र चढ़वाया था। इनका मेला वर्ष में दो बार (चैत्र व आश्विन नवरात्रों) में लगता है।

4. लोक देवी कैला देवी- इनका मंदिर त्रिकूट पर्वत पर करौली में स्थित है, जिसका निर्माण 1900 ई. में गोपाल सिंह ने करवाया था। इनके मंदिर के सामने बोहरा भक्त की छतरी स्थित है। यह करौली के यदुवंशी शासकों की कुलदेवी थी। ये देवी वर्तमान में यादवों की कुल देवी तथा मीणा व गुर्जर जाति की आराध्य देवी है। इनका मेला चैत्र शुक्ल अष्टमी को आयोजित होता है जिसमें लांगुरिया व जोगनिया गीतों का गायन आकर्षण का केंद्र है।

5. लोक देवी शीतला माता- चाकसू जयपुर में इनके मंदिर का निर्माण सवाई माधोसिंह प्रथम ने करवाया था। ये कुम्हार जाति की कुलदेवी है। तथा इनके मंदिर में पुजारी भी कुम्हार जाति का ही होता है। इसे चेचक एवं बोदरी रोग की निवारक देवी माना जाता है। इनका मेला प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी (शीतलाष्टमी) को आयोजित होता है। ये एकमात्र ऐसी लोक देवी है जिसकी खंडित मूर्ति की पूजा की जाती है।

6. लोक देवी आई माता- उनका मंदिर बिलाड़ा (जोधपुर) में स्थित है। यह सीरवी जाति की कुलदेवी है। इनके मंदिर में गुर्जर जाति का प्रवेश निषेध है। इनके मंदिर में अखंड दीपक जलता रहता है जिसकी ज्योत से कैसर टपकती है तथा इनका मेला प्रति माह शुक्ल द्वितीया को आयोजित होता है। इनके मंदिर को दरगाह तथा पुजारी को दीवान कहते हैं।

7. लोक देवी जमुवाय माता- इनके मंदिर का निर्माण दुल्लेराय ने जमवारामगढ़ (जयपुर) में करवाया था। यह कछुआ राजवंश की कुलदेवी है।

8. लोक देवी रानी सती- इनका मंदिर झुंझुनू में स्थित है। ये अग्रवाल समाज की कुलदेवी है। इनका मेला सतीया अमावस्या को आयोजित होता है तथा इनके मंदिर को शक्तिपीठ कहा जाता है। क्षेत्रीय लोगों में यह लोक देवी दादी राणी के नाम से प्रसिद्ध है।

9. लोक देवी दधिमाता- इनका मंदिर गोट मांगलोद नागौर में महामारू शैली में बना है। ये दाधीच ब्राह्मणों की कुलदेवी है।

 

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