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लोक देवता हड़बूजी का जीवन परिचय 2024 | lok Devta hadbuji Biography in Hindi

लोक देवता हड़बूजी का जीवन परिचय 2024 | lok Devta hadbuji Biography in Hindi

लोक देवता हड़बूजी का जीवन परिचय 2024 | lok Devta hadbuji Biography in Hindi , हड़बूजी का जन्म कहां हुआ ? , हड़बूजी के माता-पिता का क्या नाम है ? , हड़बूजी के गुरु का क्या नाम है ?

लोक देवता हड़बूजी का जीवन परिचय 2024 | lok Devta hadbuji Biography in Hindi
लोक देवता हड़बूजी का जीवन परिचय 2024 | lok Devta hadbuji Biography in Hindi

लोक देवता हड़बूजी का जीवन परिचय 2024 | lok Devta hadbuji Biography in Hindi

लोक देवता हड़बूजी सांप्रदायिक सद्भावना के लोक देवता बाबा रामदेव के मौसेरे भाई थे। लोक देवता हड़बूजी सांखला को भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही पता चल जाता था इसलिए इन्हें भविष्य वक्ता भी कहा जाता है।

हड़बूजी का जन्म कहां हुआ ?

लोक देवता हड़बूजी सांखला का जन्म राजस्थान के नागौर जिले के भुंडेल गांव में हुआ था।

हड़बूजी के माता-पिता का क्या नाम है ? 

हड़बूजी की माता का नाम सौभाग दे था तथा इनके पिता का नाम मेहराज सांखला था।

हड़बूजी के गुरु का क्या नाम है ?

लोक देवता हड़बूजी के गुरु बलिनाथ थे। जिनसे हड़बूजी ने आध्यात्मिक ज्ञान की शिक्षा प्राप्त की थी। तथा लोक देवता बाबा रामदेव और हड़बूजी के घनिष्ठ संबंध थे।

लोक देवता हड़बूजी के उपनाम

लोक देवता हड़बूजी को शकून शास्त्र का ज्ञाता तथा भविष्यवक्ता और चमत्कारिक सिद्ध पुरुष कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इनको भविष्यवाणी बताने का विशेष ज्ञान भी प्राप्त था।

लोक देवता हड़बूजी का मुख्य मंदिर कहां है ?

लोक देवता हड़बूजी सांखला का मुख्य मंदिर राजस्थान के जोधपुर जिले के बैंगटी गांव में स्थित है। इनके मंदिर में यहां बैलगाड़ी की पूजा अर्चना की जाती है तथा इनके मंदिर का निर्माण मारवाड़ के राव अजीत सिंह द्वारा करवाया गया था।

लोक देवता हड़बूजी किसके समकालीन थे?

लोक देवता हड़बूजी सांखला जोधपुर के शासक राव जोधा के समकालीन थे। राव जोधा ने हड़बूजी के आशीर्वाद से ही 1453 ईस्वी में मंडोर पर अधिकार किया था। इससे खुश होकर राव जोधा ने मंडोर विजय के पश्चात हड़बूजी को बैंगटी गांव की जागीर उपहार के रूप में दी थी।

लोक देवता हड़बूजी ने समाधि कहां ली थी ?

शकुन शास्त्र के ज्ञाता कहे जाने वाले लोक देवता हड़बूजी ने रुणिचा नामक स्थान पर समाधि ली थी।

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