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घूमर लोक नृत्य- राजस्थान

घूमर लोक नृत्य- राजस्थान

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घूमर लोक नृत्य- राजस्थान
घूमर लोक नृत्य- राजस्थान

घूमर लोक नृत्य- राजस्थान

घूमर लोक नृत्य राजस्थान का एक विश्व प्रसिद्ध लोक नृत्य है जिसका विश्व के लोक नृत्य में चौथा स्थान आता है। घूमर लोक नृत्य की उत्पत्ति मध्य एशिया के भृंग नृत्य से हुई है ऐसा माना जाता है ‌।

घूमर लोक नृत्य के उपनाम 

इस लोक नृत्य को राजस्थान राज्य की आत्म तथा राजकीय लोक नृत्य के उपनाम से जाना जाता है इसके अलावा इस लोक नृत्य को नृत्यों की आत्मा और राजस्थान के नृत्य का हृदय तथा नृत्यों का सिरमौर और रजवाड़ी स्कंध भी कहा जाता है।

घूमर लोक नृत्य कब किया जाता है

घूमर लोक नृत्य मुख्य रूप से राजस्थान के जयपुर जिले का प्रसिद्ध है जयपुर जिले में सबसे बड़ा घूमर लोक नृत्य आयोजित होता है। यह लोक नृत्य राजकीय तथा धार्मिक व गणगौर तथा तीज के अवसर पर किया जाता है।

यह भी जानें राजस्थान की बोलियां (Rajasthan ki boliyan)

घूमर लोक नृत्य के दौरान कौन सा वाद्य यंत्र बजाया जाता है ?

इस लोक नृत्य के दौरान नगाड़ा, शहनाई और ढोल वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है जो कि इस लोक नृत्य में सुर तथा लाल को बढ़ावा देते हैं। यह लोक नृत्य अष्टताल पद्धति पर आधारित लोक नृत्य है।

घूमर लोक नृत्य के दौरान नृत्यांगना की जो चाल होती है उसे चल को सवाई चल के नाम से जाना जाता है इस लोक नृत्य के दौरान नृत्य में नृत्यांगना 80 काली का लहंगा पहनती है जो की देखने में बहुत आकर्षक होता है।

यह भी जानें राजस्थानी भाषा (Rajasthani language in Hindi)

जल सारंगधर की कथा पर आधारित यह लोक नृत्य राजस्थान ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में अपनी अमिट छाप रखता है। इस लोक नृत्य में साधारण महिलाएं भी भाग ले सकती है लेकिन अधिकांश रूप से इस लोक नृत्य को राजपूत महिलाएं करती है।

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