चारभुजा नाथ जी का मेला कब और कहां लगता है ?

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चारभुजा नाथ जी का मेला कब और कहां लगता है ?

चारभुजा नाथ जी का मेला कब और कहां लगता है ?
चारभुजा नाथ जी का मेला कब और कहां लगता है ?

चारभुजा नाथ जी का मेला कब और कहां लगता है ? इस आर्टिकल में हम आपको यह बताने का प्रयास करेंगे तथा चारभुजा नाथ जी के मेले की प्रमुख विशेषता क्या है ?

चारभुजा नाथ जी का मेला कब और कहां लगता है ?

मेवाड़ के सिरमोर के रूप में जाने जाने वाले चारभुजा नाथ जी का मेला भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन लगता है। इस मेले की गिनती मेवाड़ क्षेत्र के अंदर लगने वाले प्रमुख मेलों के अंतर्गत आती है।

श्री चारभुजा नाथ जी का मेला राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित गढ़बोर नामक स्थान पर लगता है इस मेले में राजस्थान सहित देश के अनेक राज्यों से भी सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं और श्री चारभुजा नाथ जी की आराधना करते हैं।

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चारभुजा नाथ जी के मेले की प्रमुख विशेषता अनेकता में एकता है यहां पर सभी समुदाय के लोग अपनी अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं तथा हर समुदाय को भगवान चारभुजा नाथ जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

प्राचीन जनश्रुति आधार पर ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर मेवाड़ का सबसे प्राचीन मंदिर है तथा इस मंदिर का निर्माण पांडवों के द्वारा करवाया गया था। इस प्राचीन श्री चारभुजा नाथ जी के मंदिर में भगवान कृष्ण की काले रंग की प्रतिमा स्थित है।

यह प्रतिमा देखने में बहुत ही सुंदर और सजी धजी दिखाई देती है इस काली प्रतिमा को सोने तथा चांदी के आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है तथा हर महीने की एकादशी तिथि को विधिवत रूप से भगवान चारभुजा नाथ जी की पूजा अर्चना की जाती है।

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ऐसी मान्यता है कि चारभुजा नाथ जी को स्नान करवाने के बाद यदि उस जल को कोई भक्त ग्रहण कर लेता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जल ग्रहण करने वाले भक्तों के सभी कार्य शुभ तरह से संपन्न होते हैं।

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