महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है ?
महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है ? , महाशिवरात्रि का व्रत रखने का महत्व, महाशिवरात्रि कब मनायी जाती है ?

महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है ?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
महाशिवरात्रि का व्रत रखने की अनेक वजह है ये व्रत कोई भी शिव भक्त रख सकता है। महाशिवरात्रि का व्रत रखने से हर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। क्योंकि इस दिन भगवान शिव और पार्वती सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था।
इसलिए महाशिवरात्रि का व्रत विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखती है तथा अविवाहित महिलाएं शीघ्र ही शादी होने की अभिलाषा में रखती है।
महाशिवरात्रि को शिव भक्त, शिव को प्रसन्न करने के लिए कावड़ लाते हैं तथा शिवलिंग पर दूध का अभिषेक कर के भांग, धतूरा व पुष्प अर्पण करते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की ईश्वर से दुआ करते हैं।
सनातन धर्म में सभी व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत महाशिवरात्रि का माना गया है। क्योंकि सनातन धर्म में ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव प्रकट हुए थे। इसलिए व्रतों में महाव्रत महाशिवरात्रि के व्रत को ही माना जाता है।
महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर विभिन्न शिवालयों पर जागरण व भजन संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन होता है इन कार्यक्रमों के माध्यम से भक्तगण भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं तथा अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना भी इस महापर्व पर भगवान शिव से करते हैं।
महाशिवरात्रि को सर्वाधिक शिव भक्तों की भीड़ केदारनाथ में उमड़ती है। महाशिवरात्रि के कई दिनों पूर्व से ही यहां भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है तथा महाशिवरात्रि को सभी भक्तों शिवलिंग के दर्शन करने को लेकर आतुर रहते हैं।
केदारनाथ धाम में दर्शन करने के बाद महाशिवरात्रि को भक्तों को शिवलिंग को स्नान कराने के बाद चरणामृत बांटा जाता है तथा चरणामृत ग्रहण करने के बाद सभी भक्तगण व्रत खोलते हैं तथा भोजन करते हैं।
आशा करते हैं महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है यह जानकारी आपको समझ में आई होगी।


