बायतु विधानसभा सीट होगी खत्म, हरीश चौधरी को करनी होगी मेहनत

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बायतु विधानसभा सीट होगी खत्म, हरीश चौधरी को करनी होगी मेहनत

बाड़मेर जिले की बायतु विधानसभा सीट का अस्तित्व खतरे में है क्योंकि 31 दिसंबर 2025 को राजस्व विभाग द्वारा जारी सूचना के मुताबिक में बायतु उपखंड अब बाड़मेर जिले में शामिल होगा और पाटोदी व गिड़ा तहसील बालोतरा जिले में ही रहेगी।

ऐसे में बाड़मेर में शामिल होने के बाद बायतु विधानसभा सीट का क्षेत्र बहुत छोटा हो गया है और अब बाड़मेर के ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल करके परिसीमन के दौरान बाड़मेर ग्रामीण विधानसभा सीट का सृजन किया जा सकता है।

बायतु विधानसभा सीट से बालोतरा जिले में शामिल हुए पाटोदी और गिड़ा क्षेत्र को परिसीमन के दौरान नई विधानसभा सीट बनाया जा सकता है और इसके साथ सिणधरी व पचपदरा विधानसभा सीट के कुछ क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है।

हरीश चौधरी को नई सीट तलाशनी होगी

अब बायतु विधायक हरीश चौधरी को नई विधानसभा सीट तलाश करनी होगी, हरीश चौधरी बायतु विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके है। पुर्व में सांसद भी रहे है। लेकिन हरीश चौधरी के लिए बायतु विधानसभा सीट को भरोसेमंद माना जाता था पर अब समीकरण बदल गए है, दो नई सीटें परिसीमन में अस्तित्व में आएगी ।

कांग्रेस पार्टी तीन बार यहां से चुनाव जीती और एक बार ये विधानसभा सीट भाजपा के खाते में गई। 2013 के चुनाव में यहां से भाजपा के कैलाश चौधरी ने विधानसभा सीट जीता था, कर्नल सोनाराम चौधरी कांग्रेस पार्टी से 2008 के विधानसभा चुनाव जीते।

2018 और 2023 के विधानसभा चुनाव में हरीश चौधरी ने चुनाव जीता और आरएलपी पार्टी के उम्मेदाराम बेनीवाल दुसरे स्थान पर रहे। उम्मेदाराम बेनीवाल अब कांग्रेस से बाड़मेर जैसलमेर लोकसभा सीट से सांसद है।

अब भाजपा के यहां से 2013 चुनाव के उम्मीदवार बालाराम मूढ़ क्षेत्र में सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे थे, लेकिन कहीं न कहीं भाजपा के स्थानीय नेताओं में इस सीमांकन बदलाव को लेकर नाराजगी है, ऐसे में अभी तक भाजपा के किसी भी नेता ने खुलकर अपनी बात नहीं रखी , ना ही बालाराम मूढ़ ने न ई सीमाओं को लेकर सरकार के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

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