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राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य 2023 | Rajasthan ke pramukh Loknatya

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राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य 2023 | Rajasthan ke pramukh Loknatya

ख्याल, फड़, नौटंकी, स्वांग, तमाशा, रामलीला, रम्मत आदि राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य है, इनमें से भी नौटंकी, रामलीला और स्वांग अधिक लोकप्रिय हैं।

राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य
राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य

राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य से जुड़ी पुरी जानकारी से हम आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताएंगे.

नौटंकी लोकनाट्य कला- राजस्थान में भरतपुर में लोकनाट्य कला में नौटंकी का ग्रामीण जन जीवन में विशेष स्थान रहा है।

मुख्यतः नौटंकी की कानपुरी और हाथरसी दो प्रमुख से लिया है लेकिन भरतपुर क्षेत्र में सदा से ही हाथरस शैली की नौटंकी अत्यधिक लोकप्रिय रही है इस नाट्य शैली में नक्कारे वाद का प्रयोग प्रमुखता से किया जाता है।राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य में नौटंकी लोकनाट्य का विशेष स्थान है‌

रासलीला लोकनाट्य- रासलीला लोकनाट्य का प्रारंभ रामलीला से पहले ही हो गया था यह लोकनाट्य वल्लभाचार्य द्वारा प्रारंभ किया गया था.

राजस्थान के प्रमुख महोत्सव

राजस्थान में रासलीला के प्रवर्तक के रूप में हित हरिवंश जाने जाते हैं तथा राजस्थान में रासलीला का प्रमुख केंद्र ब्रज व मारवाड़ है.

रामलीला लोकनाट्य- राजस्थान में ये लोकनाट्य भरतपुर का प्रसिद्ध है इस लोकनाट्य में नौ रसों का समावेश होता है. तथा इस लोक नृत्य में पात्र रामायण के नाटक का प्रदर्शन करते हैं.

स्वांग लोकनाट्य- यह लोकनाट्य भी भरतपुर का प्रसिद्ध है यह एक हास्य प्रधान लोक नृत्य है जिसमें विचित्र वेशभूषा से कलाकार हंसी तत्वों क द्वारा लोगों का मनोरंजन करते हैं.

यह लोकनाट्य नृत्य, अभिनय तथा वाद्य यंत्रों की उपयोगिता की दृष्टि से नौटंकी कला की रंगत लिए होती है इसका मंचन खुले स्थानों पर किया जाता है.

इस लोकनाट्य के प्रमुख कलाकार भीलवाड़ा के जानकीलाल भांड तथा उदयपुर के परशुराम हैं तथा ये राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य में शामिल है.

राजस्थान के लोक देवता

ख्याल लोकनाट्य- ख्याल राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्य में सबसे लोकप्रिय विधा है इसकी विषय वस्तु पौराणिक अथवा पूराख्यान तथा तत्कालीन लोकप्रिय वीराख्यान से जुड़ी होती है.

कुचामनी ख्याल लोकनाट्य- इस लोक नृत्य का प्रारंभ लच्छीराम नामक लोकनाट्य कार द्वारा किया गया था इस लोक नाट्य में लोकगीतों की प्रधानता होती है तथा स्त्री चरित्र का अभिनय भी पुरुष पात्र ही करते हैं.

तुर्रा कलंगी ख्याल लोकनाट्य- इस ख्याल लोकनाट्य की रचना मेवाड़ के शाह अली और तकनगीर नामक दो संत पीरों ने की थी। इस ख्याल लोकनाट्य में तुर्रा को शिव तथा कलंगी को पार्वती का प्रतीक माना जाता है.

रम्मत लोकनाट्य- इस लोक नृत्य कला का विकास बीकानेर में हुआ बीकानेर का आचार्यों का चौक इसके लिए प्रसिद्ध है तथा तेज कवि ने इस पर पुस्तक लिखी.

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फड़ लोकनाट्य- इस लोक नृत्य में फूफा अपने प्रिय वाद्य यंत्र रावण्हत्ता को बजाते हुए स्वयं भी नाचता-गाता रहता है। राजस्थान में सर्वाधिक लोकप्रिय फड़ पाबूजी की है तथा लंबी देवनारायण जी की है.

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