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जनेऊ धारण क्यों करते है ? , janeu kyu pehnate Hain ?

जनेऊ धारण क्यों करते है ? , janeu kyu pehnate Hain ?

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जनेऊ धारण क्यों करते है ? ,  janeu kyu pehnate Hain ?
जनेऊ धारण क्यों करते है ? , janeu kyu pehnate Hain ?

सनातन धर्म में गृहस्थ , वानप्रस्थ ,तथा ब्रह्मचारी तीनों को ही जनेऊ यानी कि यज्ञोपवित धारण करना आवश्यक बताया गया है। इस लेख में हम आपको बताएंगे जनेऊ धारण करने से संबंधित विस्तृत जानकारी।

जनेऊ धारण क्यों करते है ?

जनेऊ धारण करने के पीछे कई वैदिक तथा धार्मिक महत्व है जनेऊ केवल धागा मात्र नहीं है बल्कि इसमें संपूर्ण देवी देवताओं का निवास होता है इसीलिए इसे धारण करते हैं।

जनेऊ में कितने धागे होते हैं ?

गृहस्थ जीवन जीने वाले तथा वानप्रस्थ जीवन जीने वाले लोगों के जनेऊ में दो जोड़े जाने की चार धागे होते हैं जबकि ब्रह्मचारी जीवन जीने वाले लोगों के जनेऊ में 3 जोड़ी यानी कि 6 धागे होते हैं।

जनेऊ पहनने के फायदे

जनेऊ पहनने से व्यक्ति का मस्तिष्क तेज गति से कार्य करता है तथा शारीरिक विकास तेज गति के साथ होता है।

इसको पहनने वाले व्यक्ति में किसी भी प्रकार की शारीरिक विकार उत्पन्न नहीं होते हैं। तथा संपूर्ण जीवन में किसी भी प्रकार का कोई भी धार्मिक आर्थिक तथा मानसिक संकट इसे धारण करने वाले व्यक्ति पर नहीं आता है।

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जनेऊ पहनने का नियम

  • जनेऊ सदैव अभिमंत्रित करके ही पहनना चाहिए।
  • जनेऊ पहनने से पहले किसी भी विद्वान पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

किस कान में जनेऊ पहनना चाहिए ?

दाएं तथा बाएं कान में अपनी इच्छा अनुसार जनेऊ धारण किया जा सकता है।

जनेऊ कितनी बार कान में लगाए ?

जनेऊ कान में जब भी आपको कोई अपवित्र कार्य करना हो तब लगाया जाता है जैसे कि लघु शंका या दीर्घ शंका करते समय सदैव जनेऊ कान में लगाना चाहिए।

जनेऊ अशुद्ध कब होता है ?

जनेऊ (यज्ञोपवित) तब अशुद्ध होता है जब हम उसकी पवित्रता का ध्यान नहीं रखते हैं या फिर निश्चित समय अवधि के दौरान उसको बदलते नहीं है इसके अलावा जब यज्ञोपवीत कमर से नीचे चला जाता है तो भी अशुद्ध हो जाता है।

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जनेऊ कान में ही क्यों पहनते हैं ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार जनेऊ को कान में पहनना है उचित माना गया है इसलिए जनेऊ को सदैव कान में ही पहना जाता है। लेकिन मुख्य रूप से जनेऊ कंधे पर रहता है परंतु कोई भी अपने अपवित्र कार्य करते समय जनेऊ कान पर रहता है।

जनेऊ कैसे पहनते हैं

जनेऊ हमेशा किसी भी विद्वान पंडित की सलाह से पहनते हैं तथा इसको कंधे व कान पर धारण करते हैं।

जनेऊ कितने दिन में बदले ?

वैसे तो जनेऊ यानी कि यज्ञोपवित तब तक अशुद्ध नहीं होता है जब तक आप उसको लघु शंका या दीर्घ शंका करते समय कान में डालते रहते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार जनेऊ को 4 माह में बदल लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण तथा चंद्र ग्रहण के उपरांत भी जनेऊ यानी कि यज्ञोपवित बदल लेना चाहिए।

Disclaimer: उपर्युक्त जानकारी हमारे द्वारा विभिन्न स्त्रोतों के माध्यम से प्राप्त करके आपके साथ साझा की गई है यदि इसमें किसी भी प्रकार की कोई भी त्रुटि होती है तो इसके लिए Gaanvkhabar जिम्मेदार नहीं होगा.

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