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राजस्थान के प्रमुख लोकगीत | Rajasthan ke lokgeet

राजस्थान के प्रमुख लोकगीत | Rajasthan ke lokgeet

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राजस्थान के प्रमुख लोकगीत | Rajasthan ke lokgeet
राजस्थान के प्रमुख लोकगीत | Rajasthan ke lokgeet

राजस्थान के प्रमुख लोकगीत | Rajasthan ke lokgeet

लोकगीत किसी भी क्षेत्र की संस्कृति के मूल वाहक होते है, मरूभूमि (राजस्थान) के लोकगीत उमंग, वियोग एवं हृदय की पीड़ा भावना के परिचायक है।

 राजस्थान का राज्य लोकगीत कौन सा है ?

हम सर्वप्रथम बात करेंगे राजस्थान के राज्य लोकगीत “केसरिया बालम पधारो नी म्हारे देश” की इस गीत को सर्वप्रथम बार उदयपुर निवासी गवरी बाई ने गाया था यह गीत मांड शैली में गाया जाता है तथा इसे सर्वाधिक बार अल्लाह जिल्ला बाई ने गाया था, इस गीत में पति की प्रतीक्षा करती नारी की विरह व्यथा का गायन किया जाता है।

राजस्थान के प्रमुख लोकगीत कौन-कौन से हैं ?

राजस्थान में पुत्र प्राप्ति के अवसर पर जच्चा या होलर गीत गाए जाते है, तो विवाह अवसर पर परणेत गीतों का अपना अलग ही महत्व है.

राज्य के मेवात क्षेत्र (अलवर भरतपुर) का प्रमुख लोकगीत हिचकी है जो किसी को याद करते समय गाया जाता है तथा इस गीत के बोल है “म्हारा पियाजी बुलावे म्हाने आवे हिचकी”

पश्चिमी राजस्थान में ऊंट के श्रृंगारों का वर्णन करते हुए गाए जाने वाला लोकगीत है गोरबंद जिसकी बोल है “लड़ली लूमा झूमा ऐ म्हारो गोरबंद नखरालो”

वहीं राज्य के मारवाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकगीत है कुरजां जिसके माध्यम से भील स्त्री अपने परदेस गए पति को संदेश भेज दी है तथा अनुरोध करती है कि है पतिदेव अब बहुत समय बीत चुका है अब तो अपने देश पधारो.

राजस्थान के हाडोती क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक गीत बिछुडो है इस गीत के माध्यम से बिच्छू द्वारा काटी गई स्त्री अपने पति को दूसरी शादी करने का संदेश देती है.

राज्य में वर-वधू को जादू-टोना से बचाने हेतु कांमण लोकगीत गाये जाते हैं जिनका शाब्दिक अर्थ होता है प्रेम का जादू.
राजस्थान के धौलपुर, भरतपुर व अलवर क्षेत्र का रसिया लोकगीत प्रसिद्ध है जो बम नृत्य के साथ गाया जाता है.

वहीं राज्य के पश्चिमी जिले जैसलमेर में गाए जाने वाला शृंगारिक लोकगीत है मूमल जिसमें ऐतिहासिक प्रेमाख्यान का विवरण है इस गीत का संबंध जैसलमेर की राजकुमारी मूमल से है और इस संपूर्ण गीत में जैसलमेर की राजकुमारी मूमल का नखशिख वर्णन किया गया है.

राजस्थान के करौली क्षेत्र में लांगुरिया लोकगीतों का प्रचलन है जो करौली क्षेत्र की कुल देवी केला देवी की आराधना में गाए जाते हैं। वही राज्य में किसानों का प्रेरक लोकगीत तेजा गीत है जो खेती शुरू करने से पूर्व तेजाजी की आराधना में गाया जाता है.

राजस्थान में दांपत्य प्रेम का परिचायक लोकगीत पपैया है जो वर्षा ऋतु में गाया जाता है इस गीत के माध्यम से प्रियसी अपने प्रियतम से उपवन में आकर मिलने की प्रार्थना करती है.

राज्य के रेगिस्तानी इलाकों मारवाड़, बीकानेर तथा शेखावटी में गाए जाने वाला लोकगीत पीपली है इस गीत के माध्यम से पत्नी अपने प्रदेश के प्रति को बुलाती है।

राजस्थान में दाहोद लोक गीतों का महत्वपूर्ण स्थान है इन गीतों के माध्यम से गर्भवती स्त्री जिन अभिलाषित वस्तुओं को खाने की इच्छा रखती है उनका रोचक वर्णन किया जाता है।

राजस्थानी संस्कृति में पग-पग पर लोकगीतों का गायन होता है यहां के लोकगीत अपने अंदर अनेक संदेश समेटे हुए हैं जो लोगों की खुशी, उल्लास के तथा मार्मिक व्यथा का सजीव चित्रण है।

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