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करणी माता का जीवन परिचय 2024 | कहानी | इतिहास

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करणी माता का जीवन परिचय 2024 | कहानी | इतिहास

करणी माता का जीवन परिचय 2024 | कहानी | इतिहास , करणी माता का जन्म कब और कहां हुआ ? , करणी माता के माता-पिता का नाम , करणी माता का मंदिर कहां है ?

करणी माता का जीवन परिचय 2024 | कहानी | इतिहास
करणी माता का जीवन परिचय 2024 | कहानी | इतिहास

करणी माता का जीवन परिचय 2024 | कहानी | इतिहास

लोक देवी करणी माता को आवड माता/तेमडे राय का अवतार माना जाता है। इनके मंदिर प्रांगण में सैकड़ो की तादाद में चूहा विचरण करते हैं इसलिए इसे चूहों वाली देवी भी कहा जाता है। इस माता के मंदिर में सफेद चूहों को काबा कहकर संबोधित किया जाता है। कुछ भक्त जीण माता को दाढ़ी वाली डोकरी के उपनाम से भी संबोधित करते हैं।

1459 में करणी माता ने मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर) की नींव रखी थी। इसलिए इस किले को गढ़ चिंतामणि के नाम से जाना जाता है।

लोक देवी करणी माता के आशीर्वाद से ही बीकानेर के शासक राव बीका ने जांगल प्रदेश में अपने राज्य की स्थापना की थी तथा बीकानेर नगर बसाया था। करणी माता के बचपन का नाम रिद्धि बाई था।

करणी माता की स्मृति में गाए जाने वाले गीतों को चिरजा कहते हैं। जो दो प्रकार के होते हैं, जिनमें सिंघाऊ तथा चड़ाऊ प्रमुख है।

करणी माता का जन्म कब और कहां हुआ ? 

करणी माता का जन्म विक्रम संवत 1444 (आश्विन शुक्ल सप्तमी) के दिन जोधपुर जिले के फलोदी के निकट सुवाप/सुआप गांव में हुआ था।

करणी माता के माता-पिता का नाम

लोक देवी करणी माता की माता का नाम देवल तथा पिता का नाम मेहाजी किनिया था।

करणी माता का मंदिर कहां है ?

करणी माता का प्रमुख तथा मुख्य मंदिर बीकानेर जिले के देशनोक नामक स्थान पर है।

करणी माता की मृत्यु कब हुई ?

विक्रम संवत 1595 (चैत्र शुक्ल नवमी) को गडियाला गांव (जैसलमेर) धनेरु तलाई के किनारे करणी माता ने अपना देहात त्याग किया था और इसी स्थान पर करणी माता की मृत्यु हुई थी।

करणी माता किसकी कुलदेवी है ?

लोक देवी करणी माता चारण जाति की कुलदेवी है तथा बीकानेर के राठौड़ वंश की इष्ट देवी/आराध्य देवी है।

करणी माता का विवाह किसके साथ हुआ ?

लोक देवी करणी माता का विवाह साठिका गांव (बीकानेर) के देपाजी चारण के साथ हुआ था।

करणी माता के प्रमुख मंदिर

करणी माता मंदिर देशनोक बीकानेर- यहां पर करणी माता का मुख्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर की नींव बीकानेर के शासक रावजैतसी ने रखी थी तथा इस मंदिर के मुख्य निर्माता बीकानेर के शासक सूरत सिंह को माना जाता है। और इस मंदिर के वास्तुकार हिरजी मिस्त्री थे। इस मंदिर को मत कहा जाता है।

तथा इस मंदिर में रहने वाले सफेद चूहों को करणी माता का स्वरूप माना जाता है। जिन्हें काबा कहा जाता है। इस मंदिर में सावन भादो नामक दो बड़ी कड़ाईया रखी गई है और यहां पर चैत्र व आश्विन के नवरात्रों में मेले का आयोजन होता है।

नेहड़ी जी मंदिर देशनोक बीकानेर- यह भी करणी माता का ही मंदिर है। यहां पर राज्य सरकार द्वारा करणी माता का पैनोरमा स्थापित किया गया है।

मंशापूर्ण करणी माता मंदिर- यह मंदिर राजस्थान के उदयपुर जिले में है जो मच्छियां मगरी पहाड़ी पर स्थित है। राजस्थान का दूसरा रोप-वे इसी मंदिर पर लगाया गया है।

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